Tuesday , 13 January 2026
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Agra News: Atul Krishna Bhardwaj expressed his feelings of faith in Shrimad Bhagwat Katha…#agranews

आगरालीक्स….जीवन के दो सबसे बड़े दुख, जन्म और मृत्यु, समझ जाएंगे तो तर जाएं…श्रीमद्भागवत कथा में अतुल कृष्ण भारद्वाज  ने बहाए आस्था के भाव

जीवन का लक्ष्य मानव मां की कोख से जन्म लेकर भूलने लगता है। धन की कमी, प्रेम की कमी, सफलता की कमी को लोग जीवन का दुख समझने की भूल करते हैं जबकि सही मायने में बार− बार जन्म और मृत्यु ही दो सबसे बड़े दुख के कारण हैं। जन्म मृत्यु की परिभाषा का आध्यात्मिक रूप से बखान किया कथा व्यास संत अतुल कृष्ण भारद्वाज ने। शुक्रवार को डिफेंस एस्टेट, फेस−1 स्थित श्रीराम पार्क में राजेंद्र प्रसाद गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित की गयी दिव्य श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन सृष्टि रचना नारद चरित्र, परीक्षित जन्म और सुखदेव आगमन प्रसंग के साथ जीवन उद्देश्य पर कथा व्यास ने उपदेश दिया।
 
मुख्य यजमान सुनील गोयल एवं श्वेता गोयल ने व्यास पूजन किया। इसके बाद राधे राधे के जयकारों के साथ द्वितीय दिवस के कथा प्रसंग को आगे बढ़ाया गया।  कथा व्यास अतुल कृष्ण महाराज ने कहा कि मनुष्य का जन्म बड़े दुखों के साथ होता है और मृत्यु भी दुख ही करती है, फिर भी मनुष्य यह जानते हुए संसार में सुख और आन्नद की तलाश करता है। वास्तव में उसने अपने जीवन का लक्ष्य कभी परमात्मा को बनाया ही नहीं। उन्होंने कथा श्रवण के महत्व को बताते हुए कहा कि कथा श्रवण कर यदि मनुष्य आत्म चिन्तन करे और उस पर अमल करे तो जीवन का अर्थ ही बदल जायेगा। देह का संबंध संसार से है किंतु आत्मा का संबंध परमात्मा से। इस पर विचार कर कर्म करते रहिए किंतु हृदय से सदैव विरक्त रहिए। गृहस्थ में रहकर संयम से जीवन जीना ही सबसे अच्छा तप है।

अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने बताया कि हर युग के साथ परमात्मा को प्राप्त करने का मार्ग बदल जाता है। सतयुग में तप, त्रेतायुग में जप और ध्यान से पाया जा सकता था, लेकिन कलयुग में तो भगवान की भक्ति से ही कल्याण हो जाता है। उन्होंने कहा कि भक्ति बिना राधा रानी की कृपा के प्राप्त होने वाली नहीं है। जो निस्वार्थ भाव से भगवान की भक्ति करता है, उसे राधा रानी की कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने ने कहा है कि कलयुग में इतनी उथल पुथल है कि एकाकी ध्यान नहीं लग सकता, इसलिए ध्यान लगाने की जगह ध्यान से चलें। संसार में रहते हुए बुद्धि मन से योगी हो जाए और चित्त में भगवान को उतार लें। चित्त को कोई संत-सत्संग अथवा जीवन में गुरू आ जाए तो वह भगवान की ओर लगा देते हैं, बिना गुरु के सम्भव नहीं है अर्थात जीवन में सदगुरू की बड़ी भूमिका होती है।

उन्होंने कथा प्रसंग के संदर्भ में कहा कि राजा परीक्षित ने कलयुग के प्रभाव में आकर एक संत का अपमान कर दिया, जिसका परिणाम उन्हें श्राप के रूप में भुगतना पड़ा। इस माध्यम से उन्होंने समाज को संदेश दिया कि संतों, भक्तों और ब्राह्मणों का सदैव सम्मान करना चाहिए और उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। पंकज बंसल ने बताया कि शनिवार को कथा में कपिल मनु, ध्रुव एवं सती चरित्र प्रसंग होंगे। भगवान दास बंसल ने बताया कि आयोजन में तीन दिन रास लीला भी होगी। आठ, नौ और दस फरवरी को कथा प्रसंग के बाद सायं 7:30 बजे से वृंदावन धाम के स्वामी प्रदीप कृष्ण ठाकुर द्वारा रासलीला की प्रस्तुति होगी। 
कथा की व्यवस्थाएं दीपक गोयल, तनु गोयल, रवि गोयल, आरती गोयल, मनमोहन गोयल, पवन गोयन, विष्णु दयाल बंसल, छोटे लाल बंसल, अमित गर्ग, संदीप मित्तल आदि ने संभालीं। 

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