आगरालीक्स…प्लास्टिक, माइक्रोप्लास्टिक और नैनो प्लास्टिक ने हमारे पर्यावरण के लिए खतरा पैदा कर दिया है, ’बीट प्लास्टिक पाॅल्यूशन’ डीईआई की पोस्टर प्रदर्शनी ने सोचने पर मजबूर कर दिया
आगरा में दयालबाग शिक्षण संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग की ओर से पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्दश्य से एक आॅनलाइन पोस्टर एवं निंबध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें विभिन्न स्कूलों-काॅलेजों के छात्रों ने शब्दों और कलात्मक रचनाओं के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए। छात्रों ने जो पोस्टर एवं निबंध रचनाएं प्रस्तुत कीं उनमें पर्यावरण के प्रति प्रभावशाली एवं गंभीर विषय दिखाई दिए। यूं तो प्रत्येक पोस्टर ने ही दर्शकों को प्रेरित किया लेकिन जजों के एक प्रतिष्ठित पैनल ने सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करने के बाद पोस्टर प्रतियोगिता का प्रथम स्थान डीईआई के युवराज वर्मा को दिया। युवराज की कलाकृति में प्लास्टिक प्रदूषण के स्त्रोत और पर्यावरण पर उनके प्रभाव को चित्रित किया गया था।

डीईआई की ही नीलम बघेल ने एक वैज्ञानिक पोस्टर के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र और मानव पर प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभाव पर अपने विचार व्यक्त किए। द्वितीय पुरस्कार संस्कृति अवस्थी के नाम रहा जिन्होंने समुद्री जीवन पर प्लास्टिक प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव दिखाए। श्वेता चैधरी ने प्लास्टिक प्रदूषण के कारण, प्रभाव और समाधान पर कलात्मक प्रस्तुति दी। खुशी, श्वेता यादव, पाल गंगवार, स्निग्धा चैरसिया ने अपनी रचनात्मकता के जरिए तीसरा स्थान प्राप्त किया। वहीं निबंध प्रतियोगिता में रितिका तालरेजा और रिचा शर्मा ने प्लास्टिक प्रदूषणः कारण, प्रभाव और समाधान पर अपनी वाक्यपटु कृति के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। अंशिता विज, सोनिया त्यागी और सुमिरन दयाल ने स्थाई प्लास्टिक प्रदूषण प्रथाओं की तात्कालिकता पर प्रकाश डालने वाले अपने विचारोत्तेजक निबंध के लिए दूसरा स्थान प्राप्त किया। तीसरा स्थान अस्तुति सोंधी, आलिया शाहिद, दीपाली कुशवाह, मनी उपाध्याय के नाम रहा। विजेताओं को सम्मानित किया गया और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
रसायन विभाग के डाॅ. रंजीत कुमार ने वर्तमान समय के दबाव वाले पर्यावरणीय मुद्दों से निपटने में सक्षम पर्यावरण के प्रति जागरूक व्यक्तियों की एक पीढ़ी के पोषण करने व तैयार करने में इस तरह की पहल के महत्व पर जोर दिया। रसायन विभाग के अध्यक्ष प्रो. रोहित श्रीवास्तव ने कहा कि डीईआई अपने विभिन्न शैक्षिणिक और आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से सतत व सुनहरा भविष्य बनाने का मार्ग प्रशस्त करता रहता है।
निर्णायक मंडल में डाॅ. अपर्णा सत्संगी, डाॅ. मंजू श्रीवास्तव शामिल थीं। आयोजन को सफल बनाने में डाॅ. अनुपम श्रीवास्तव, वैष्णव बरतरिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।