आगरालीक्स… आगरा के प्रमुख मंदिरों में पट खुलने-बंद होने का समय बदलेगा। भगवान को भोग में कढ़ी-चावल, दाल-चावल, चपाती, दही, ठंडी रबडी, गन्ने के रस के संग आईसक्रीम भी।
गर्मियों की दस्तक के साथ बदलाव शुरू
गर्मियों की दस्तक के साथ शहर के प्रमुख मंदिरों में भगवान के दर्शनों के समय में बदलाव के साथ भगवान के भोग में मेन्यू में बदलाव किया जा रहा है। मंदिरों समय और भोग और पोशाक में परिवर्तन एक मार्च और होली बाद से शुरू हो जाएंगे।
कैलाश महादेव मंदिर

कैलाश महादेव मंदिर के मंहत आचार्य गौरव गिरी ने बताया कि सर्दियों के मौसम को देखते हुए भगवान के भोग के रूप में अब तक तरह-तरह के गर्म हलवा, आलू के पराठे, चाय का भोग लगाया जा रहा था।
मंदिर के पट खुलने का समय अब यह रहेगा

कैलाश महादेव मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए पट सुबह साढ़े पांच बजे खुल रहे हैं। एक मार्च से सुबह पांच बजे से पट खुल जाएंगे। दोपहर को पट दो बजे से तीन बजे बंद रहेंगे। तीन बजे से रात नौ बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे।
भगवान को अब यह लगाए जा रहे हैं भोग

गर्मियों में भगवान के भोग में भी परिवर्तन होगा। पोशाक भी ग्रीष्म ऋतु के अनुसार होगी। भोग में अब रोटी-सब्जी, दाल पूड़ी, हलवा, दही, छाछ, मठा, गन्ने का रस और घर की बनी आईसक्रीम का भोग लगेगा।
बल्केश्वर महादेव मंदिर में पोशाक में बदलाव
बल्केश्वर महादेव मंदिर के महंत कपिल नागर ने बताया कि भोलेनाथ के वस्त्रों में बदलाव शिवरात्रि के बाद से कर दिया गया है। ऊन से बने कपड़े आदि कर्म वस्त्र हटा दिए गए हैं। भगवान के श्रृंगार के लिए कॉटन और हल्के वस्त्रों का उपयोग किया जा रहा है।
गर्भगृह में एसी चलेगा, चांदी की जलहरी से जलधारा

भगवान के गर्भगृह में गर्मियां तेज होने पर एसी को चालू कर दिया जाएगा। शिवरात्रि से भगवान की चांदी की जलहरी से 24 घंटों जल अर्पित किया जा रहा है।
केसर से बने भोग बंद, अब ठंडी रबड़ी व अन्य भोग
भगवान के भोग में पहले केसर और मेवा का भोग लगता था लेकिन अब ठंडी रबड़ी, बर्फी, मलाई, फल, गन्ने का रस आदि के भोग लगाए जा रहे हैं।
बल्केश्वर महादेव मंदिर में सोमवार को रात 10 बजे तक दर्शन
मंदिर में दर्शनों के समय के बारे में उन्होंने बताया कि सुबह साढ़े पांच बजे से आठ बजे तक और शाम को पांच बजे से आठ बजे तक भगवान के दर्शन होते हैं। सोमवार को शाम के दर्शन का समय दो घंटे ज्यादा रहता है, इस दिन शाम पांच बजे से रात 10 बजे तक दर्शन होते हैं।
खाटू-श्याम मंदिर

खाटू-श्याम मंदिर के अनिल मित्तल जी ने बताया कि भगवान के अभिषेक, दर्शन और पोषाक अपने परंपरगत तरीके से होते हैं। इ समें कोई विशेष बदलाव नहीं होता है। विशेष आयोजन सोमवार और शनिवार को मंदिर में किए जाते हैं।