आगरालीक्स…आगरा में कारोबारी की 13 साल की बेटी को दान करके साध्वी बनाने के मामले की शिकायत. चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट ने कहा—यह कृत्य मानव तस्करी जैसा. आरोपियों पर हो कार्रवाई, बच्ची की हो काउंसलिंग
आगरा में कुंंडौल के नयामील निवासी पेठा कारोबारी संदीप सिंह की 13 साल की बेटी राखी को महाकुंभ के जूना अखाड़े में दान करने, उसे साध्वी बनाने के मामले की शिकायत बाल कल्याण समिति, बाल आयोग, महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और इलाहाबाद हाईकोर्ट को पत्र लिखकर की गई है. चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस ने इस मामले को उठाते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और बच्ची की काउंसलिंग कराने की मांग की है.
चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट ने ये की शिकायत
चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस ने शिकायती पत्र में लिखा है कि ”आगरा के कुंडौल के नया मील निवासी संदीप धाकरे की 13 वर्षीय पुत्री राखी स्प्रिंग फील्ड इण्टर कॉलेज में कक्षा नौ की छात्रा थी. वह पढ़ने होशियार थी. वह पढ़ लिखकर आईएएस बनना चाहती थी लेकिन छात्रा के पिता ने उसकी पढ़ाई छुड़वाकर उसे जूना अखाड़े के साधुओं को दान में दे दिया. वह गेरूआ वस्त्र पहनकर साधु भेष में रह रही है. 19 जनवरी 2025 को छात्रा के परिजन उसका पिण्डदान करेंगे जबकि पिण्डदान मरणोपरांत किया जाता है. छात्रा कोई वस्तु नहीं है जिसे दान में दिया जा सके. यह कृत्य मानव तस्करी के दायरे में आता है. भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 143 (आईपीसी की धारा 370) के तहत अपराध है. किशोर न्याय (देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 का उल्लंघन है.
पत्र में आगे लिखा कि किसी भी बच्चे का परित्याग किया जाता है तो उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत होकर समर्पित किया जाता है. बाल कल्याण समिति बाल हित को सर्वोपरि मानते हुए बच्चे को सुरक्षित स्थान पर आश्रय दिलाती है. बच्चों को गोद देने के लिए भी भारत में अलग से प्रावधान हैं. गोद लेने के लिए नियमों का पालन करना होता है. फॉस्टर केयर में बच्चे की परवरिश करने के लिए कारा और किशोर न्याय अधिनियम की गाइडलाइन का पालन करना होता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद – 21क के तहत छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा देने का प्रावधान है. शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आता है. बालिका की पढ़ाई छुड़वाकर उसे मौलिक अधिकारों से वंचित किया है। जिस अखाड़े में बालिका को दान में दिया गया है वह संस्थान किशोर न्याय (देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के अंतर्गत पंजीकृत भी नहीं है. वहां बालिका का भविष्य सुरक्षित नहीं हैं.
आसाराम का दिया उदाहरण
पत्र में उन्होंने लिखा है कि पूर्व में धार्मिक संस्थानों में बाल शोषण के मामले प्रकाश में आ चुके हैं. संत आसाराम इसका प्रमुख उदाहरण है, जो बाल यौन शोषण के मामले में पॉक्सो के तहत सजा काट रहे हैं. मीडिया में आई खबरों से प्रेरित होकर देश के अन्य लोग भी अपनी बेटियों को साधुओं को दान में दे सकते हैं. एक नई परंपरा शुरू होने की संभावना है, जिससे बड़ी संख्या में बच्चों के बाल अधिकारों उल्लंघन होगा। बच्चों के मौलिक अधिकारों का अतिक्रमण होगा।
यह की मांग
चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस ने मांग की है कि माता पिता द्वारा साधुओं को दान में दी गई किशोरी राखी को चाइल्ड लाइन तथा पुलिस के माध्यम से मुक्त कराकर उसकी काउंसलिंग कराई. उसे सुरक्षित स्थान पर आश्रय दिलाया जाए. उसकी पढ़ाई पुनः सुचारू कराई जाए. आरोपियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाए, जिससे किसी अन्य बच्चों को दान में न दिया जा सके.
ये है पूरा मामला
आगरा के फतेहाबाद रोड के डौकी में रहने वाले संदीप सिंह पेठा कारोबारी हैं,परिवार में पत्नी रीमा और बड़ी बेटी 13 साल की राखी और छोटी बेटी निक्की हैं. राखी स्प्रिंग फील्ड इंटर कालेज में कक्षा नौ की छात्रा है. संदीप अपने परिवार के साथ 26 दिसंबर को प्रयागराज महाकुंभ के लिए गए हैं, उन्होंने वहां अपनी बेटी राखी को गंगा स्नान करने के बाद जूना अखाड़े के संत कौशल गिरि को दान कर दिया. संत कौशल गिरि ने मंत्रोचार के साथ राखी का प्रवेश कराया और गौरी नाम रखा है. 19 जनवरी को पिंडदान होना था, इसके बाद से गौरी अपने परिवार से अलग हो जाएगी.
सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद लिया निर्णय
इधर, नाबालिग को साध्वी बनाने की सोशल मीडिया पर आलोचना शुरू हो गई. राखी जूना अखाड़ा में साध्वी की वेशभूषा में रह रही थी, कहा जा रहा था कि दीक्षा दिलाने के बाद महाकुंभ में धर्मध्वजा पर संस्कार कराया जाएगा, इसके बाद परंपरा के अनुसार , बालिका का जीते जी पिंडदान कराने की घोषिता की गई.