आगरालीक्स…आगरा के एसएन में 26 साल के रोगी का हुआ जटिल कूल्हा पुनर्निमाण. डॉ. रजत कपूर और उनकी टीम ने सफल आपरेशन कर रोगी की गतिशीलता की बहाल
फतेहाबाद के 26 वर्षीय पुरुष रोगी, हरेंद्र, जो 10 वर्षों से पोस्ट-सेप्टिक सीक्वेले और पैर छोटा होने के साथ डिस्प्लास्टिक हिप से पीड़ित थे, जिसको एस एन मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट परोफेसर डिपार्टमेंट ऑफ़ आर्थोपेडिक्स के पद पर कार्यरत डॉ रजत कपूर एवं उनकी टीम जटिल कूल्हा पुनर्निर्माण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। रोगी, जिसका पहले कहीं और ऑपरेशन हुआ था, गंभीर पेल्विक ऑब्लिकिटी और कार्यात्मक विकलांगता के साथ आया था। सबट्रोकैनटेरिक ऑस्टियोटॉमी के साथ कूले का प्रत्यारोपण किया जो पैर की लंबाई की विसंगति को दूर करने और श्रेष्ठतम कार्य के लिए अंग को फिर से संयोजित करने के लिए सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध प्रक्रिया थी। सावधानीपूर्वक निष्पादित इस ने रोगी की मुद्रा और गतिशीलता में काफी सुधार किया है, जिससे उसे जीवन की नई राह मिली है।
क्या होता है ये डिस्प्लास्टिक हिप या हिप डिस्प्लेसिया—-
हिप डिस्प्लेसिया में शिशुओं के कूल्हे के जोड़ो को प्रभावित करती है। कूल्हे का निकलना यानी डिस्लोकेशन आमतोर में आसान नहीं होता है मगर डिस्प्लेसिया के मरीज़ मे यह निकलने की अधिक संभावना होती है।
यह समस्या तब होती है जब कूल्हे की जोड़ की हड्डियाँ सही डंग से एक साथ फिट नहीं होती।
हिप डिप्लासिया के लक्षण क्या होते है।
कूल्हे यानी हिप मे निरंतर दर्द रहना
चलते या चलते समय लँगड़ाना
पैरो की लंबाई अलग-अलग होना ।
जिस तरफ़ का कूल्हा ख़राब है उस तरफ़ की पैरो की मांसपेशियों का कमज़ोर या पतली पड़ना