आगरालीक्स…25 साल बाद…वही स्कूल, वही ड्रेस, वही क्लासरूम और वही स्टूडेंट….आगरा के सेंट जॉर्जेस कॉलेज में वर्ष 2000 के बैच की हुई रीयूनियन तो झूम उठीं स्कूल की यादें. शरारती मुस्कानों के साथ पुराने छात्रों ने साझा किए अनुभव..

सेंट जॉर्जेस कॉलेज, बालूगंज में वर्ष 2000 बैच की 25वीं रीयूनियन बड़े ही हर्षोल्लास और भावनात्मक माहौल में संपन्न हुई। इस अवसर पर स्कूल के वर्तमान प्रिंसिपल श्री अक्षय जेरेमियाह एवं वर्ष 2000 में पदस्थ प्रिंसिपल जे. एस. जेरेमियाह सहित 25 से अधिक शिक्षकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल की घंटी बजने के साथ एल्यूमनी द्वारा अभ्यास कक्षा में उपस्थिति दर्ज कराकर जब की गई तो सभी को अपने छात्र जीवन की यादें ताजा हो गयीं। जब विशेष रूप से 1986 से 2000 के बीच लोकप्रिय रहे स्कूल स्नैक्स परोसे गए तो सबको बचपन के स्वाद याद आ गए। एल्यूमनी के लिए विशेष रूप से तैयार की गई टी-शर्ट्स का वितरण भी किया गया, जिसकी व्यवस्था मयंक गुप्ता (एल्यूमनी) द्वारा की गई थी।

इसके पश्चात शिक्षकों का भव्य स्वागत किया गया। नाश्ते के उपरांत कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रगान, दीप प्रज्वलन एवं स्कूल प्रार्थना के साथ हुई, जिसे जेएस जेरेमियाह और अक्षय जेरेमियाह ने संपन्न किया। शिक्षकों को वर्ष 2000 बैच के एल्यूमनी द्वारा शॉल ओढ़ाकर एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शिक्षकों ने भी अपने पुराने अनुभव साझा किए और छात्रों की शरारतों को मुस्कान के साथ याद किया। डॉ. अंकुर बंसल, नवप्रियो बोस, अंकित मखीजा, डॉ. असीम शिरोमणि, रोहित धवन, नितिन अरोड़ा, डॉ. श्रेयांश चाहर, रोहित मगन और अनिमेष विश्वास ने शिक्षकों को समर्पित मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

कार्यक्रम का संचालन पलक माथुर द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। इस रीयूनियन की एक विशेष बात यह रही कि देश-विदेश से 100 से अधिक एल्यूमनी इसमें शामिल हुए। साथ ही सहायक स्टाफ को भी मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। सभी छात्रों ने स्कूल प्रांगण में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम का यूट्यूब पर लाइव प्रसारण भी किया गया, जिसे देश-विदेश में मौजूद पूर्व छात्रों ने उत्साहपूर्वक देखा। कार्यक्रम के समापन पर एल्यूमनी द्वारा लंच की विशेष व्यवस्था की गई थी। इस पूरे आयोजन की योजना और संचालन मुख्य रूप से सारिका दुआ, प्रणीश मेहरा, उत्कर्ष खंडेलवाल, सौरभ साहनी, तरनजीत पुरी, अंकित खंडेलवाल, ललित मल्होत्रा और डॉ. असीम शिरोमणि ने मिलकर किया।


हमारे टीचर्स ने आज हमें जब हमारी शैतानियां और शरारतें याद दिलाईं तो हम अपनी हँसी और अपनी भावनाओं को रोक नहीं सके। हमने जब उनके लिए प्रस्तुतियां दीं तो हमारे टीचर्स भी अपने उत्साह को प्रदर्शित करते रहे। उन्होंने जैसा हमें बनाया, वैसे आज हम उनके सामने थे और यह नजारा बेहद खूबसूरत था..
सौरभ साहनी
पुराने टीचर्स से मिलकर बहुत अच्छा लगा। 25 साल बाद स्कूल में आए तो रोंगटे खड़े हो गए। जिन टीचर्स की वजह से हमने अपना मुकाम हासिल किया, उन्हें सामने देखकर उनके प्रति श्रद्धा खुद ब खुद छलकने लगी।
उत्कर्ष खंडेलवाल
20-25 वर्ष पुराने शिक्षकों से मिलकर जो अनुभूति हुई, उसका शब्दों में वर्णन असंभव है। हमने जब उन टीचर्स के पैर छुए तो आंखों में आंसू आ गए। हम अपने पुराने दोस्तों से गले मिले तो ऐसा लगा जैसे बिछड़े हुए भाई मिल गए हों।
प्रनीश मेहरा
25 साल बाद अपने विद्यालय में आए तो एक अलग सा प्रेम और भावना का ऐसा मिला-जुला संगम था कि हम कभी आंसू आंसू हो गए तो कभी देर तक मुस्कुराते और खिलखिलाते रहे.. आज टीचर्स से मिलकर लगा कि इन्होंने हमें उस वक्त नहीं सुधारा होता तो आज हम जीवन में ऊंचे मुकाम हासिल नहीं कर पाते..
सारिका दुआ