आगरालीक्स…मोती कटरा को क्रॉस करके हींग की मंडी पहुंची मेट्रो की अपलाइन टीबीएम. मकानों में दरारों पर मेट्रो अधिकारी बोले—150 घरों में दरारों की जानकारी, सभी की होगी मरम्मत. अब डाउनलाइन में खोदी जा रही सुरंग…
आगरा मेट्रो के लिए इस समय तेजी से मनकामेश्वर स्टेशन से लेकर आईएसबीटी तक निर्माण कार्य चल रहा है. इनमें मनकामेश्वर से आरबीएस कॉलेज तक मेट्रो अंडरग्राउंड है. इस दूरी में चार अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जा रहे हैं जिनमें एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा कॉलेज, राजा की मंडी और आरबीएस कॉलेज हैं. इसके बाद मेट्रो ऐलिवेटेड होगी जिसके बाद तीन मेट्रो स्टेशन आईएसबीटी, गुरुद्वारा गुरु का ताल और सिकंदरा स्टेशन बनाए जाएंगे. हाइवे पर मेट्रो ऐलिवेटेड होगी.
मोती कटरा को क्रॉस हुई अपलाइन
आगरा कॉलेज से मनकामेश्वर की ओर चलने वाली अपलाइन टीबीएम ने मोती कटरा को क्रॉस कर लिया है और अब यह हींग की मंडी की ओर पहुंच गई है. मेट्रो के अनुसार अपलाइन के कारण मोती कटरा में करीब 50 मकानों में दरारें आने की सूचना मिली लेकिन इनमें से 35 मकानों को रिपेयर कर दिया गया है. बाकी मकानों की रिपेयरिंग का भी काम चल रहा है. वहीं डाउनलाइन अभी भी मोती कटरा में है. इस डाउनलाइन के कारण क्षेत्र के कई मकानों में जैक लगाए गए हैं जिससे की मकान स्थिर रहे. इनकी संख्या भी 100 के करीब है. आगरा कॉलेज से मनकामेश्वर के बीच अपलाइन और डाउन लाइन टीबीएम द्वारा अंडरग्राउंड खुदाई का काम आगामी 45 से 50 दिन के अंदर पूरा कर लिया जाएगा.
मेट्रो की कोर टीम रखेगी अब नजर
इस मामले में मेट्रो के अधिकारी का कहना है कि जिन लोगों द्वारा कहा जा रहा है कि हमारे मकानों में मरम्मत का काम ठीक से नहीं किया जा रहा है, उन पर नजर रखने के लिए अब मेट्रो की कोर टीम बनाई गई है. रिपेयिरिंग का काम पूरी तरह से ठीक किया जाएगा, इसमें कोई लापरवाही नहीं होगी. 150 मकानों में दरारों की सूचना है, सभी मकानों में रिपेयेरिंग का सही तरह से किया जाएगा. अगर इनके बाद भी कोई समस्या आती है तो उसका समाधान भी किया जाएगा.
भय न फैलाएं, अंडरग्राउंड का काम पूरी तरह सुरक्षित
मोती कटरा में मकानों में दरारें आने की सूचना पर मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि मेट्रो के लिए सुरंग बनाने का काम पूरी तरह से सुरक्षित रूप से किया जा रहा है. मकानों को स्थिर रखने के लिए ही जैक लगाए गए हैं. इसके अलावा जिन मकानों में दरारें आई हैं वो मकान 50 से 60 साल पुराने हैं. इन्हें भी यूपीएमआरसी की ओर से रिपेयर कराया जा रहा है. जल्द ही मोती कटरा में सुरंग का काम पूरा कर लिया जाएगा. मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि मोती कटरा इलाके में टीबीएम से सुरंग निर्माण से किसी प्रकार की क्षति की आशंका नहीं है. आगरा मेट्रो की टीम पूरी सावधानी से निर्माण कर रही है निर्माण. पहले से जर्जर मकानों की दरारों और टूट-फूट की भी मरम्मत की जा रही है. मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि अंडरग्राउंड मेट्रो के लिए सुरंग खोदने का काम राजा की मंडी से आरबीएस तक भी किया गया है. यहां भी काफी मकानों के नीचे से मेट्रो का निर्माण हो रहा है लेकिन यहां कोई समस्या नहीं आई है.
सुरंग निर्माण से कंपन अंतरराष्ट्रीय मानकों से तीस गुना तक कम
यूपीएमआरसी के अधिकारियों का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरुप अत्याधुनिक तकनीक से सुरंग बनाई जा रही है. टीबीएम से टनल निर्माण के दौरान कंपन तीव्रता और ज़मीन के सेटलमेंट की मात्रा अंतर्राष्ट्रीय मानकों से तीस से सौ गुना तक कम है. मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि 2 से 3 तीव्रता से कंपन होने पर मकानों में दरारें आती हैं जबकि यही तीव्रता अगर 6 से 8 तक हो जाती है तो मकान गिरते हैं लेकिन मेट्रो के लिए सुरंग बनाने के लिए टीबीएम से केवल .3 एमएम के हल्के कंपन महसूस होते हैं. इससे मकानों को किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है.
जर्जर मकानों को कुछ समय के लिए खाली कराकर मुआवजा दिया जा रहा है
मेट्रो के अनुसार ऐसे जर्जर मकानों के निवासियों को को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरुप ही घर खाली करवाकर कुछ दिनों के लिए होटल या सुविधाजनक स्थानों पर मुआवजे के साथ शिफ्ट कर दिया जाता है. टीबीएम के नीचे से गुजरजाने के बाद उन्हें कुछ दिनों में वापस शिफ्ट कर दिया जाता है. ये देखा गया है कि इन पुराने और जर्जर मकानों की नीव भी बेहद कमजोर होती है जो आमतौर पर एक मंजिल के लायक होती है पर समय के साथ उसी में दो या तीन मंजिल के मकान बनने से जर्जर होने की स्थिति और खराब हो जाती है. उन्हीं स्थानों में मजबूत बने मकानों में टनल निर्माण का कोई फर्क नहीं पड़ता है. मेट्रो समय समय पर सुरंग निर्माण कार्य के दौरान जर्जर मकानों को रिपेयर करवा रहा है.
औसतन एक दिन में 12 मीटर खुदाई करती है टीबीएम
आगरा मेट्रो द्वारा प्रयोग की जा रही टीबीएम एक दिन में औसतन 12 मीटर की खुदाई करती है, फिलहाल, गति को भी कम किया गया है. एक दिन में 12 मीटर खुदाई करने के बाद जैसे—जैसे टीबीएम आगे बढ़ती जाती है, अतिसंवेदनशील एरिया भी उसी दायरे में बढ़ता जाता है. जहां अतिसंवेदनशील दायरा कम होता जाता है, वैसे ही खाली कराए गए मकानों की जांच पड़ताल के बाद लोगों को पुनः उनके मकानों में शिफ्ट कराया जाता है.