आगरालीक्स…आगरा में मार्मिक अपील. अनचाहे नवजात को कूड़ेदान में न फेंके. बिना पहचान बताए बस पालना में छोड़ जाएं. इस अस्पताल के पास लगेगा पालना, ऐसे दिया जाएगा आश्रय
अनचाहे नवजात शिशु विशेष रूप से बेटियां जिन्हें जन्म लेते ही डस्टबिन, कटीली झाड़ियों, नदी, तालाब, कुएं में फेंक दिया जाता है, जहां वह भयानक मृत्यु को प्राप्त होते हैं या उन्हें बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन या अन्य असुरक्षित स्थानों पर छोड़ दिया जाता है जहां से वह अधिकांशतः गलत हाथों में जाकर भिक्षावृत्ति, वेश्यावृत्ति या अन्य अनैतिक कार्यों में धकेल दिए जाते हैं और वह मासूम मृत्यु से भी भयावह जीवन व्यतीत करने को मजबूर हो जाते हैं। इन मासूम नवजात शिशु के जीवन रक्षार्थ “सुरक्षित परित्याग” हेतु विधि सम्मत रूप से स्थान एवं व्यवस्थाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा राज्य के सात संभाग मुख्यालय लखनऊ, गोरखपुर, प्रयागराज, आगरा, मेरठ, झांसी, और कानपुर राजकीय मेडिकल कॉलेजो के महिला चिकित्सालयों में आश्रय पालना स्थल के स्थापना की स्वीकृति प्रदान की गई हैं।

शिशु को छोड़ने वाले की सुरक्षा एवम् गोपनीयता
- आश्रय पालना स्थल हाईटेक मोशन सेंसर से युक्त होंगे जिससे कि पालना स्थल में शिशु को छोड़ने के 2 मिनिट पश्चात चिकित्सालय के स्वागत कक्ष में अपने आप घंटी बजेगी। इस दो मिनट के समय में छोड़ने वाला व्यक्ति आसानी से सुरक्षित रूप से वहां से जा सकेगा और इससे उसकी पहचान भी गोपनीय बनी रहेगी।
- जो भी व्यक्ति आश्रय पालना स्थल के पालना में नवजात शिशु का सुरक्षित छोड़ता है उसकी पहचान पूर्ण रूप से गुप्त रखी जाएगी। ना ही उसे रोका जाएगा, ना ही टोका जाएगा, ना ही कुछ पूछा जाएगा, ना ही उन्हें पकड़ा जाएगा, ना ही उसके विरुद्ध पुलिस में कोई एफआईआर दर्ज की जा सकेगी।
मासूम की सुरक्षा एवम् पुनर्वास
- स्वागत कक्ष में घंटी बजते ही चिकित्साकर्मी द्वारा आश्रय पालना स्थल से शिशु को तत्काल प्राप्त कर उसकी चिकित्सकीय एवं व्यक्तिगत देखभाल यथा उसको दूध पिलाना, साफ सफाई करना, स्वच्छ कपड़े पहनाना आदि की जावेगी।
- शिशु के स्वस्थ होने पर उसे तत्काल नजदीकी राजकीय मान्यता प्राप्त शिशु गृह में भेज दिया जाएगा।
- जिला बाल कल्याण समिति द्वारा शिशु को आवश्यकतानुसार दत्तक ग्रहण हेतु विधिक रुप से स्वतंत्र घोषित किया जाएगा।
- केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण द्वारा शिशु के दत्तक ग्रहण की कार्यवाही की जावेगी।
- तत्पश्चात जिला न्यायालय द्वारा उस शिशु को दत्तक ग्रहण के माध्यम से पुनर्वास कर दिया जाएगा।
आश्रय पालना स्थल से लाभ :
- समस्त अनचाहे नवजात शिशु को जीने का अधिकार प्राप्त हो सकेगा।
- इच्छुक दंपति इन मासूम को विधि अनुरूप गोद ले कर अपना परिवार पूरा कर सकेंगे।
- हर मासूम को स्वस्थ, सुरक्षित एवं खुशनुमा माहौल में स्नेह व सम्मान के साथ विकसित होने का अवसर प्राप्त हो सकेगा।
- अच्छी परवरिश से आने वाले कल यह मासूम समाज एवं राष्ट्र के लिए अमूल्य संपत्ति बन सकेंगे।
आश्रय पालना स्थलों की स्थापना महेशाश्रम, मां भगवती विकास संस्थान, उदयपुर द्वारा अपने “जीवन संरक्षण अभियान” के तहत की जा रही है। इस अभियान से अब तक सैकड़ों – सैकड़ों मासूम बच्चों का जीवन बचाया एवम् बनाया जाना संभव हो सका हैं।
प्रेसवार्ता को सम्बोधित योग गुरु देवेंद्र अग्रवाल, सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल डॉ टी पी सिंह ,डॉ कमल भारद्वाज दवारा किया गया।