आगरालीक्स…दिल की धमनियों में जमा जिद्दी कैल्शियम इलाज की बड़ी बाधा है, स्टेंट भी नहीं लग पाते मगर आईवीएल विधि इस कैल्शियम को चूरा बना देती है, पुष्पांजलि हाॅस्पिटल में डाॅ. मनीष शर्मा ने इस विधि से एक और जिंदगी बचाई
आगरा में पुष्पांजलि हाॅस्पिटल में इंटरवेंशनल कार्डियोलाॅजिस्ट द्वारा इस्तेमाल की जा रही नई तकनीक इंट्रावस्कुलर लिथोट्रिप्सी (आईवीएल) ने कोरोनरी आर्टरी डिजीज की धमनियों में जमा कैल्शियम का सफाया कर मरीजों को नवजीवन दे रही है। वरिष्ठ ह्दय रोग विशेषज्ञ डाॅ. मनीष शर्मा के मुताबिक यहां डेढ़ साल पहले पहली बार आईवीएल विधि का इस्तेमाल किया गया था और इसके बाद अब तक कई मरीजों की जान बचाई जा चुकी है।
हार्ट अटैक होने पर बेहोशी की हालत में गुरूवार को हाथरस निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग को देहली गेट स्थित पुष्पांजलि हाॅस्पिटल लाया गया था। यहां एंजियोग्राफी कराने के बाद ह्दय की दांई ओर वाली धमनी में 99 प्रतिशत ब्लाॅकेज का पता लगा। डाॅ. मनीष शर्मा ने बताया कि यह काफी लंबा और कठोर ब्लाॅकेज था। इस तरह के मामलों में जमा कैल्शियम को हटाना और स्टेंट डालना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। मगर अब आईवीएल विधि की मदद से मरीज के ह्दय की धमनी में जमा इस कैल्शियम को तोड़कर निकाला और फिर स्टेंट डाले गए। मरीज अब पूरी तरह सुरक्षित है। एक दिन बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
डाॅ. मनीष ने बताया कि उनके द्वारा यह तकनीक काफी समय से इस्तेमाल की जा रही है। यह एक प्रकार की चिकित्सा और उपकरण है जो कोरोनरी के अंदर शाॅक वेव्स देती है और जमा कैल्शियम को तोड़ देती है। यह एक क्रांतिकारी तकनीक है जो धमनियों को खोलने में मदद करती है। कई मामलों में इससे बाईपास सर्जरी को भी टाला जा सकता है। आम तौर पर मरीजों के ह्दय की नली में कैल्शियम जमा होने पर कठोर ब्लाॅक हो जाता है। ऐसे मरीजों में इंट्रावस्कुलर लिथोट्रिप्सी वरदान साबित होती है, क्योंकि यह पथराई हुई नलियों को भी खोल देती है। कैल्शियम के जमाव को सोनिक वेब के जरिए चूर-चूर कर साफ कर सफलतापूर्वक स्टेंट लगाए जाते हैं।