आगरालीक्स …आगरा में पहली गुर्दा रोगी और मल्टी आर्गन फेल्योर मरीजों के लिए पहली सीआरआरटी मशीन शांतिवेद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में स्थापित की गई है। अत्याधुनिक मशीन से 24 घंटे डायलिसिस हो सकेगी। ( Agra News: First CRRT Machine Install in Shantived Institute of Medical Sciences Agra#Agra )
79 वें स्वतंत्रता दिवस पर आजादी के अमृत महोत्सव की भावना के साथ, शांतिवेद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, सिकन्दरा में झंडारोहण किया गया। इसके साथ ही
आगरा की पहली अत्याधुनिक सीआरआरटी (कंटीन्यूअस रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी) मशीन का लोकार्पण किया गया। यह जीवनरक्षक तकनीक आईसीयू में भर्ती गंभीर किडनी फेलि.यर एवं मल्टी-ऑर्गन फेलियर से पीड़ित मरीजों के लिए वरदान साबित होगी।
सीआरआरटी मशीन अशोक अग्रवाल व पूरन डावर के सौजन्य से स्थापित की गई। उदघाटन समारोह में संस्थान के निदेशक मंडल डॉ. श्वेतांक प्रकाश, डॉ. ब्लॉसम प्रकाश, डॉ. शिवांक प्रकाश, डॉ. संजय प्रकाश सहित सभी डायरेक्टर्स, वरिष्ठ चिकित्सक, प्रशासनिक अधिकारी, नर्सिंग स्टाफ, सुरक्षा कर्मी और अन्य विभागों के सदस्य मौजूद रहे।
24 घंटे काम करती है सीआरआरटी मशीन
उन्नत डायलिसिस तकनीक है, जो गंभीर और नाजुक हालत वाले मरीजों में 24 घंटे लगातार काम करती है। यह धीरे-धीरे अतिरिक्त पानी व विषैले पदार्थ हटाकर हृदय और रक्तचाप को स्थिर रखती है। 24×7 निरंतर प्रक्रिया, धीमी और कोमल तरल निकासी, ICU में गंभीर मरीजों के लिए सुरक्षित, इलेक्ट्रोलाइट और एसिड-बेस संतुलन बनाए रखना है। मरीज के शरीर से खून सेंट्रल वेनस कैथेटर के जरिए मशीन में जाता है।
खून की सफाई — फ़िल्टर के माध्यम से खून से अतिरिक्त पानी और विषैले पदार्थ हटाए जाते हैं; ज़रूरत होने पर रिप्लेसमेंट फ्लूइड या डायलाइसेट जोड़ा जाता है।
साफ़ खून लौटाना साफ़ खून को धीरे-धीरे वापस मरीज के शरीर में पहुंचाया जाता है।
मुख्य कार्य: शरीर से अतिरिक्त पानी हटाना, विषैले पदार्थ (यूरिया, क्रिएटिनिन) निकालना, सोडियम, पोटैशियम आदि का संतुलन बनाए रखना, pH वैल्यू स्थिर रखना,खून का तापमान नियंत्रित रखना
निदेशक डॉ. श्वेतांक प्रकाश ने बताया कि सीआरआरटी मशीन गंभीर आईसीयू मरीजों के लिए जीवनरक्षक है। यह उन परिस्थितियों में भी काम करती है, जहां पारंपरिक डायलिसिस संभव नहीं होता। इससे हम मरीज का ब्लड प्रेशर स्थिर रखते हुए, धीरे-धीरे विषैले पदार्थ और अतिरिक्त पानी निकाल सकते हैं, जिससे मरीज को अधिक सुरक्षित उपचार मिलता है। आगरा में इस मशीन की शुरुआत से अब यहां के मरीजों को बड़े शहरों में जाने की जरूरत नहीं होगी।”