आगरालीक्स…आगरा में स्कूल बस में कक्षा 1 की छात्रा की मौत. परिवहन विभाग के चार अधिकारी भी हुए निलंबित. जांच के आदेश
आगरा के एतमादपुर में स्कूल बस हादसे में कक्षा एक की छात्रा की मौत के बाद परिवहन मंत्री दयाशंकर ने संज्ञान लेते हुए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. वहीं इस घटना की जांच के आदेश परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने दिए हैं. चारों निलंबित अधिकारियों के खिलाफ जांच चलेगी तो वहीं सहायक संभागीय प्रवर्तन अधिकारी के निलंबन की संस्तुति कर रिपोर्ट शासन को भेजी है.कंडम स्कूल बस में गई बच्ची की जान
11 मार्च बुधवार को दोपहर करीब ढाई बजे आगरा के एत्मादपुर क्षेत्र में आरबीएस हायर सेकेंडरी स्कूल की बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी. यह बस कंडम स्थिति में थी और इससे नीचे गिरकर कक्षा 1 की छात्रा नैना की मौत हो गई. बच्ची के पिता ने स्कूल संचालक और बस चालक के खिलाफ केस दर्ज कराया है तो वहीं परिवहन विभाग ने भी जांच की. इसमें बस की तकनीकी स्थिति काफी खराब पाई गई थी. इसके बावजूद संबंधित प्रवर्तन अधिकारियों ने वाहन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की थी. इसलिए प्राथमिक जांच में दोषी पाए गए चार यात्री/मालकर अधिकारी नीलम, अमित वर्मा, शारदा मिश्रा ओर शिव कुमार मिश्रा को निलंबित किया गया है. वहीं सहायक संभागीय अधिकारी पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी. निलंबन अवधि में सभी अधिकारी परिवहन आयुक्त कार्यालय से संबद्ध रहेंगे. मामले की जांच के लिए उप परिवहन आयुक्त संजय सिंह को जांच अधिकारी नामित किया गया है. उन्हें एक माह के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.
नौनिहालों को स्कूल लेकर जा रहे वाहन कितने सुरक्षित हैं, इस हादसे ने हकीकत सामने ला दी. अब हादसे के बाद आरटीओ की टीम बस का रिकॉर्ड खंगालती रही. मगर आरबीएस हायर सेकंडरी स्कूल के नाम से कोई बस पंजीकृत नहीं मिली. चालक के बारे में भी जानकारी नहीं मिली. केवल यही पता चला कि चालक एत्मादपुर निवासी नरेंद्र सिंह है. स्कूल बस से हुए हादसे के बाद पुलिस और आरटीओ की टीम ने जांच की. शुरुआती जांच में सामने आया कि स्कूल बस पिछले 13 साल से चल रही है. संचालक ने बस का परमिट भी नहीं लिया. उसका स्कूल बस के रूप में आरटीओ में कोई रिकॉर्ड नहीं है। बस काफी जर्जर हो गई थी. बस मालिक और एजेंसी संचालक के बीच विवाद हुआ था. मामला उपभोक्ता आयोग में चला गया था. विद्यार्थियों के परिजन ने पुलिस को बताया कि बस आए दिन खराब हो जाती थी. चालक नरेंद्र को कई बार टोका वो हर बार यही कहता था कि बच्चे सुरक्षित हैं.
डाक्टर बनने के सपने संग चली गई बेटी नैना
मृतक छात्रा नैना का सपना था कि वह पढ़-लिखकर डाक्टर बनेगी और सभी बीमार लोगों की सेवा करेगी. इस बात का जिक्र करते हुए पिता ब्रह्मजीत की आंखों में आज, गम और गुस्से के इतने आंसू हैं, जितना उनकी टंकी में रोजाना दूध होता था. रुंधे गले से कहते हैं कि स्कूल बस के लापरवाह चालक ने अगर मानवीयता दिखाई होती तो मेरी बेटी नैना आज भी जिंदा होती. उसका डाक्टर बनने का सपना उसी के साथ चला गया.