आगरालीक्स…पती—पत्नी में रूठना, मनाना नहीं होगा तो जिंदगी बेजार लगेगी, लेकिन ये हद से न बढें, काउंसलिंग की मदद से संभल रहे टूटने की कगार पर पहुंचे रिश्ते
आगरा में पती—पत्नी की कलह तलाक तक पहुंच रही है। वजह है सहनशक्ति और बातचीत की कमी। जरा सी काउंसलिंग से टूटने के कगार पर पहुंचे रिश्ते संभल सकते हैं। आगरा में बिहेविर साइंटिस्ट एंड लाइफ कोच डॉ. नवीन गुप्ता इस पर काम कर रहे हैं। प्रदेश सरकार के महिला सशक्तीकरण अभियान मिशन शक्ति 5.0 के तहत हाल ही में पुलिस लाइंस आगरा के पुलिस मॉडर्न स्कूल में कपल कनेक्ट प्रोग्राम आयोजित किया गया था। इसके जरिए कपल्स के मतभेदों को दूर करने की कोशिश करने वाले बिहेविरय साइंटिस्ट एंड लाइफ कोच डॉ. नवीन गुप्ता से आगरालीक्स ने विस्तार से चर्चा की।डॉ. गुप्ता ने कहा कि पति-पत्नी के बीच कई बार लंबी-लंबी बहस देखने को मिलती है, जो आगे चलकर तक तलाक का कारण भी बन जाती हैं। लेकिन अगर सही समय पर साइकोलॉजिस्ट या काउंसलर को दिखा दिया जाए, तो स्थिति को संभाला जा सकता है। कपल कनेक्ट प्रोग्राम इस दिशा में एक सार्थक कदम है। ऐसे ही तमाम मामले मैं आए दिन देखता हूं, जिनमें छोटी—छोटी बातें तलाक तक पहुंच चुकी होती हैं। जबकि जरा सी समझाइश से बात संभल सकती है। पहले जहां संयुक्त परिवार में सब साथ रहते थे। घर के बड़े बातों को संभाल लिया करते थे वहीं अब एकल परिवारों में झगड़े शांत कराने वाले नहीं हैं।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि हर दिन प्यार से ही रहेंगे तो जिंदगी मुकम्मल नहीं होगी। इसलिए लड़ने-झगड़ने से बचें नहीं बल्कि इसे एंजॉय करें। लेकिन अक्सर ऐसा देखा जाता है कि स्थिति कई बार हाथों से बाहर निकलने लगती है और झगड़े की वजह से परिवार का माहौल खराब होता है।
जोर-जोर से चिल्लाना और एक-दूसरे पर आरोप लगाना या हाथ उठाना सही नहीं है। इसकी जगह शांत मन से एक—दूसरे से बात करें, क्योंकि नाराजगी जाहिर करने का तरीका हर बार चीखना या चिल्लाना नहीं हो सकता। इससे सामने वाले को आपकी बात समझ नहीं आएगी और इसका असर बच्चे या परिवार के अन्य लोगों पर भी पड़ेगा। ऐसी स्थिति में दोनों शख्स को काउंसलिंग की जरूरत होती है। अगर उनकी काउंसलिंग सही तरीके से हो जाए तो चीजें सही हो जाती हैं।
अगर दोनों में से कोई एक व्यक्ति गलती मान ले तो बात कभी आगे नहीं बढ़ेगी लेकिन खुद को सही साबित करने की कोशिश में ऐसा कोई करता नहीं है। कई बार कोई एक व्यक्ति अपनी गलती नहीं मानता तो कई बार दोनों में से कोई भी अपनी गलती नहीं मानता। लिहाजा काउंसलिंग की मदद लेनी पड़ती है।
आजकल स्ट्रेस, डिप्रेशन, एंग्जायटी जैसी मानसिक बीमारियां बहुत कॉमन हो गई हैं। कुछ लोगों को सिजोफ्रेनिया और बाइपोलर डिसऑर्डर की परेशानी भी हो सकती है। इन सभी के इलाज हैं। देश में सभी तरह की मानसिक बीमारियों के इलाज की सुविधा है। यहां सायकायट्रिस्ट और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट उपलब्ध हैं। तमाम तरह की मानसिक बीमारियों का इलाज है। अगर सही काउंसलिंग हुई तो गजब का सुधार होता है। मगर इसके लिए खुद को स्ट्रेस या डिप्रेशन डिप्रेशन में मानना जरूरी है, लेकिन लोग खुद को मानसिक रोगी मानने से इनकार करते हैं। वे मदद के लिए डॉक्टर के पास या काउंसलिंग के लिए जाना ही नहीं चाहते। यहां समस्या जटिल हो जाती है।
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