आगरालीक्स…आगरा में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने लिया जैन संतों का आशीर्वाद. छीपीटोला जैन मंदिर में बोले—मेरा सौभाग्य है कि मुझे आपके दर्शन मिले
आगरा के छीपीटोला स्थित श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर पंचायति कमेटी के नेतृत्व में क्षमावाणी पर्व संतचर्या “गूगल बाबा श्रमण मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज जी”, श्रमण मुनि श्री 108 शील सागर महाराज जी, श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभात सागर महाराज जी के सानिध्य में किया जा रहा है; रविवार को मुख्य अतिथि राज्यपाल झारखंड संतोष गंगवार ने पूज्य संतों के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान राज्यसभा सांसद नवीन जैन और विधायक जीएस धर्मेश भी मौजूद रहे। इस दौरान पूज्य मुनि श्री द्वारा रचित शास्त्रों का विमोचन भी हुआ। यह अवसर धर्म, ज्ञान और साहित्य की उस समृद्ध परंपरा को नमन करने का रहा, जो समाज को सदैव सत्य, अहिंसा, संयम और सदाचार की दिशा दिखाती है।
राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि मैं ऐसी भूमि का राज्यपाल हूँ, जहाँ पर आपके अधिकांश महात्मा—मेरी जानकारी के अनुसार करीब 20—का मोक्ष/निर्वाण वहां पर हुआ। यह हमारे राज्य का सौभाग्य है कि शिखर जी की पहचान पूरे देश और दुनिया में इसी रूप में है। मैं मुनिवरों को बहुत-बहुत प्रणाम करता हूँ और विश्वास के साथ कि आपके योग्य मार्गदर्शन से इस आगरा की भूमि को कृतार्थ मिलेगा और निश्चित रूप से अच्छी बातें हम सबको सुनने को मिलेंगी। तो मैं यहाँ पर आया, यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे आपके दर्शन मिले। आपका प्रेम और आशीर्वाद देश और प्रदेश की समस्त जनता को मिले। आप सबका बहुत-बहुत आभार, धन्यवाद।”
राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने कहा कि क्षमावाणी केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन को निर्मल करने, अहंकार एवं द्वेष का त्याग करने और सभी जीवों के प्रति मैत्रीभाव स्थापित करने का संदेश है। जैन दर्शन हमें सिखाता है कि “मिच्छामि दुक्कडम्” के भाव के साथ हम अपने द्वारा जाने-अनजाने में किए गए अपराधों के लिए क्षमा मांगें और दूसरों को भी हृदय से क्षमा करें।
मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज जी ने अपनी वाणी से कहा कि वह सम्मेद शिखर पर्वत जो झारखंड की धरा से है। झारखंड की धरा पर एक सम्मेद शिखर नाम का पर्वत है, वह पर्वत सामान्य पर्वत नहीं है। वह अपनी ऊंचाइयों से अपने आप को स्थापित किए हुए हैं, साथ ही साथ उसकी ऊंचाइयां इसलिए हैं क्योंकि वहां से जो ऊंचाइयां प्राप्त की हैं, वहां अन्यत्र कोई दूसरा पर्वत नहीं जहां से इतनी ऊंचाइयां किसी ने प्राप्त की हो। वह झारखंड की भूमि, वह बिहार की भूमि, झारखंड भले ही अभी पृथक हो गया हो, किन्तु वह बिहार की भूमि, मगध क्षेत्र, जहां पर अखंड भारत की नींव रखने वाले यदि कोई प्रथम शासक वर्तमान में मौर्य सम्राट के रूप में चंद्रगुप्त मौर्य दिखाई देते थे। चंद्रगुप्त मौर्य भी अंतिम समय में दिगंबर मुनि पद को धारण करके इस भारत की भूमि पर समाधि को प्राप्त हुए।
उन्होंने कहा कि भारत को भारत का नाम यदि किसी से मिला, तो वे थे सम्राट ऋषभदेव के पुत्र चक्रवर्ती भरत सम्राट, जिन्होंने इस भारत की भूमि को ‘भारत’ नाम दिया और यह बात यहां एक विशेष है कि महावीर भगवान की देशना जो पुनः उस बिहार और झारखंड की भूमि में विपुलाचल पर्वत पर दी। राजगृही का वह पर्वत जो विपुलाचल, जहां अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने जिन देशना दी। लेकिन यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि भगवान महावीर स्वामी ने जो देशना दी थी, वह जैनियों के लिए दी ही नहीं थी।
इस अवसर पर मन्दिर कमेटी सन्देश जैन,अध्यक्ष मनोज बल्लो, महामंत्री राजीव जैन जी, कोषाध्यक्ष अक्षय जैन बंटी, बबली जैन,राकेश जैन रखी,दीपक जैन बोतल वाले, संजीव जैन बोरे, प्रवीण जैन नेता, सन्देश जैन,सुरेश सोनी जैन, नीरज जैन, निर्मल मोठ्या, बॉबी जैन, हेमंत जैन जी, अक्षय जैन जी, मुरारी लाल जैन, सतेंद्र जैन साहूला,आशु जैन, रोहित जैन, आयुष जैन मीडिया प्रभारी राहुल जैन एवं सकल जैन समाज मौजूद था l