आगरालीक्स…पुराना बिजनेस, नया आईडिया! पुराने प्रतिष्ठानों की साख है तो क्रिएटिविटी के साथ नए भी मैदान में आए हैं, कड़ाके की ठंड में कड़ाही दूध का कमबैक
सर्दियों में गरमा-गरम चीजें खाने का आनंद ही अलग होता है। जब बात कढ़ाई वाले केसलिया दूध की हो तो क्यास कहने। लगभग दो दशक पहले याद करें तो शहर में जगह—जगह दूध की कड़ाही लगा करती थीं। बीच में यह कम हो गई थीं। मगर अब एक बार फिर बाजार से कड़ाही वाले दूध की सौंधी महक उठने लगी है। शहर के हर चौक—चौराहे, गली—मोहल्ले, छोटे—बड़े प्रतिष्ठानों पर एक बार फिर शाम होते ही बड़ी सी लोहे की फैली हुई कढ़ाई में पकता हुआ दूध दिखाई देने लगा है। जिसमें बादाम, पिस्ता, काजू और केसर डालकर घंटों तक पकाया जाता है। आगरा में आज भी सालों पुरानी कई दुकानें हैं, जहां का शुद्ध देसी दूध पी कर आपके रोम-रोम तर हो जाएंगे। इसके साथ ही कई नए प्रतिष्ठान भी खुल गए हैं जहां इसी पुराने कारोबार को नए तरीके से किया जा रहा है।
आगरा के दयालबाग में फूड और चाट मार्केट है। पहले यहां दूध की कड़ाही नहीं लगा करती थीं मगर इस साल कई युवा यहां दूध की कड़ाही भी लगा रहे हैं। वे इस दूध को नए फ्लेवर और लुक भी दे रहे हैं। इसके साथ ही गाजर का हलवा, रबड़ी जैसी मिठाई भी बेच रहे हैं। रावली मंदिर के पास एक प्रतिष्ठित मिष्ठान विक्रेता हैं दशकों से कड़ाही दूध का काम होता आया है। यहां सुबह से ही कड़ाही लग जाती है और शाम तक कई बार दूध बढ़ाया जाता है। राजा की मंडी छोटे चौराहे पर चौधरी मिष्ठान केंद्र है। यहां शाम के चंद घंटों में ही 40 लीटर दूध खत्म हो जाता है। विक्रेता ने बताया कि दूध को कई घंटे तक औटाने के बाद इसमें पिश्ते और केसर डाले जाते हैं।
शहर के अन्य नामी प्रतिष्ठानों पर भी दूध की कड़ाही को समय के साथ एटेक्टिव बनाया गया है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अलमोंड वैनीला, केसर पिश्ता ,गोल्ड अलमोंड (बादाम हल्दी), डेट्स पिश्तेचू अलमोंड ,केशर इलायची और भी कई कांबीनेशन बनाए जा रहे हैं। ग्राहक खूब आकर्षित हो भी रहे हैं। देखकर लगता है जैसे लोग पुराने खान—पान की ओर लौट रहे हैं। शाम को कड़ाही दूध पीने वालों में बड़ी संख्या युवाओं की भी है। ऐसा समझा जाता है कि युवा दूध पीना भूल चुके हैं, लेकिन शाम को इन प्रतिष्ठानों के नजारे देखकर ऐसा लगता नहीं है। बल्केश्वर और कमला नगर में कई ऐसे स्थान हैं जहां कड़ाही दूध का काम पुश्तैनी या परंपरागत रूप से नहीं होता आया है लेकिन बहुत से युवा नए प्रतिष्ठान खोलकर इस काम को कर रहे हैं और काफी हद तक कामयाब भी हो रहे हैं।
सर्दी का अहसास बढ़ते ही इसकी मिठास मन को भाने लगी है। इन दिनों शहर में हर थोड़ी दूरी पर आपको कुछ न कुछ बेहतरीन जरूर मिलेगा। हर जगह केसर वाला स्वादिष्ट दूध मिलता है। कहना गलत नहीं होगा कि सर्दियों में ऊपर से गिरती ओस और गिलास में झाग वाला मलाई वाला मेवों में पका हुआ दूध मिल जाए, तो मानों सोने पर सुहागा हो गया। कुल्हड़ में अगर आपने कहीं दूध पिया, उसका सौंधा स्वाद को आपको दीवाना ही बना देगा।