आगरालीक्स…Agra News: आगरा की मिनी संसद यानी नगर निगम में ये क्या हो रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर मेयर ने नगर आयुक्त पर लगाए नौ करोड़ रुपये की नगर निगम को हानि पहुंचाने के आरोप। नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने मीडिया से कहा मेयर के आरोप झूठ का पुलिंदा हैं, सभी कार्य कार्यकारिणी से पास प्रस्तावों के आधार पर हुए हैं। जिसकी अध्यक्षता खुद मेयर ने की थी, जांच में सब स्पष्ट हो जाएगा। ( Agra News: Mayor Hemlata Diwakar complaint against Municipal Commissioner Agra )
दरअसल, मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने शनिवार को लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर नगर निगम आगरा में अधिकारियों द्वारा किए जा रहे वित्तीय गबन की थर्ड पार्टी द्वारा जांच कराने के लिए आग्रह किया। मेयर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहा कि नगर निगम आगरा में नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल द्वारा नगर निगम अधिनियम 1959 के प्राविधानों के उल्लंघन एवं गम्भीर वित्तीय अनियमितता की जा रही है। इसकी शासन द्वारा थर्ड पार्टी जांच होना अति आवश्यक है। महापौर ने मुख्यमंत्री से कहा कि नगरायुक्त द्वारा ई-टेंडरिंग की उपेक्षा कर ऑफलाइन बॉक्स प्रणाली के माध्यम से लगभग नौ करोड़ रुपये की गड़बड़ी की गई है और ठेकों में मॉनोपॉली स्थापित की गई है। महापौर ने मुख्यमंत्री से कहा कि ई-टेन्डरिंग की उपेक्षा करके इसके विपरीत लगभग 40 से 50 करोड़ के कार्य "ऑफलाइन बॉक्स प्रणाली" (10.00 लाख) की सीमा के भीतर) से कराये गये हैं, जिनमें अधिकतम 5 प्रतिशत निम्न दरें प्राप्त हुई। इस सुनियोजित प्रक्रिया से नगर निगम को अनुमानतः रू0 9.00 करोड़ की प्रत्यक्ष आर्थिक क्षति पहुँची है। इन कार्यों में एक ही ठेकेदार / प्रतिभागी को 10-10 पत्रावलियों आवंटित की गई हैं, जो कि "रोस्टर प्रणाली" और "समान अवसर" के सिध्दान्तों का खुला उल्लंघन है। यह स्थिति कार्य आवंटन की निष्पक्षता पर गम्भीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।
पत्र लिखने के बाद भी नहीं दिया कोई विवरण
महापौर ने मुख्यमंत्री से कहा कि धारा 117 (6) का नियम विरूध्द प्रयोग नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 117-6बी के अन्तर्गत प्रदत्त विशेषाधिकार केवल "अपरिहार्य आकस्मिकता" हेतु हैं। संज्ञान में आया है कि लेकिन नगरायुक्त द्वारा इस धारा का प्रयोग सामान्य प्रक्रिया के रूप में किया गया है और इसकी सूचना नगर निगम की कार्यकारिणी समिति को भी उपलब्ध नहीं करायी गयी। इसके लिए नगरायुक्त को बार-बार निर्देशित किया गया। इसके उपरान्त भी नगरायुक्त द्वारा हठधर्मिता दिखाते हुए कोई विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया।
ऑफलाइन बॉक्स के माध्यम से की जा रही वित्तीय हानि
शिकायत के बाद भी जारी वित्तीय हानि
महापौर ने मुख्यमंत्री से कहा कि उक्त के दृष्टिगत नगर निगम के वित्तीय हितों के संरक्षण हेतु उनके द्वारा नगर आयुक्त, नगर निगम आगरा को अपने कार्यालय से 17 मार्च प्रेषित किये गये तथा मौखिक रूप से भी कई बार निर्देशित किया गया तथा समय-समय पर इनकी कृत्यों के सम्बन्ध में मुख्य सचिव उ०प्र०शासन को प्रेषित किये गया, 18 मार्च को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को भी पत्र प्रेषित किये जा चुके हैं। लेकिन नगरायुक्त द्वारा लगातार नगर निगम को वित्तीय हानि पहुंचाई जा रही है। इसकी थर्ड पार्टी जांच कराना जनहित व शासन के लिए अति आवश्यक है।