आगरालीक्स…यूपी एसआई परीक्षा के प्रश्न पत्र में ‘पंडित’ शब्द पर मचा बवाल. डिप्टी सीएम ने भी जताई आपत्ति. आगरा में भी विरोध
यूपी एसआई परीक्षा के पहले दिन एक प्रश्न और उसके विकल्प में जाति शब्द का प्रयोग करने पर विवाद खड़ा हो गया है. सोशल मीडिया पर इसको लेकर हंगामा मचा हुआ है तो वहीं आगरा में भी इसका विरोध दर्ज कराया गया है. प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक् ने भी ट्वीट कर इस पर आपत्ति जताई है और जांच के निर्देश दिए गए हैं.जानिए क्या है प्रश्न
परीक्षा में एक प्रश्न पूछा गया है जिसमें लिखा है कि अवसर के अनुसार बदल जाने वाला और इस प्रश्न के उत्तर के चार विकल्प दिए गए हैं. इसमें चारों विकल्पों में पहला सदाचारी, दूसरा पंडित, तीसरा अवसरवादी और चौथा निष्कपट है. तीन विकल्प तो किसी व्यक्ति के गुण यया अवगुण के होते हैं लेकिन एक विकल्प एक जाति से जुड़ा हुआ था. इस प्रश्न पत्र के बाहर आते ही यह तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
डिप्टी सीएम ने भी जताई आपत्ति
इस प्रश्न पत्र के विकल्प में जाति का इस्तेमाल करने पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी आपत्ति जताई है और जांच के निर्देश दिए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है — उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में आए एक प्रश्न को लेकर जो विकल्प दिए गए उन पर हमे कड़ी आपत्ति है. सरकार ने गंभीरता से संज्ञान में लिया है. किसी भी प्रश्न से किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुँचती है तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है.
मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों को कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए. इस पूरे मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए गए हैं. संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
उत्तर प्रदेश सरकार सभी समाजों के सम्मान, समानता और संवेदनशीलता के सिद्धांत पर काम करती है. प्रदेश के हर नागरिक की गरिमा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.
प्रश्न पत्र के विकल्प में जाति शब्द का इस्तेमाल करने पर आगरा में भी विरोध दर्ज कराया गया है. सवर्ण समाज आगरा के नेता डॉ.मदन मोहन शर्मा ने इस विषय पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पंडित शब्द हमारी सनातन संस्कृति में विद्वता,ज्ञान और सम्मान का प्रतीक है. प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र में इस प्रकार असंवेदनशील तरीके से इसका प्रयोग करना दुर्भाग्यपूर्ण है. प्रश्नपत्र तैयार करने वाले संबंधित अधिकारियों को शब्दों के चयन में सामाजिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि सरकार और संबंधित भर्ती बोर्ड को इस प्रश्न की तत्काल जांच करानी चाहिए और भविष्य में ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए. यदि इस मामले में शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की गई तो सवर्ण समाज व्यापक स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा. समाज के लोगों ने भी सरकार से मांग की है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरती जाए.