आगरालीक्स…आगरा में काव्य पाठ प्रतियोगिता में स्टूडेंट्स ने अपनी कविताओं से मातृभाषा का किया सम्मान.
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषाविज्ञान विद्यापीठ में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर काव्य पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि प्रो. सोम ठाकुर थे, जबकि विशिष्ठ अतिथि शाशांक प्रभाकर थे। अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति माननीया प्रो. आशुरानी ने की। निर्णायक मंडल में दयालबाग शिक्षण संस्थान से डा. निशीथ गौड़ और संस्कार भारती से राज बहादुर सिंह राज शामिल थे। प्रतियोगिता में केएमआई के छात्र मनोज कुमार ने प्रथम, दाऊदयाल संस्थान की राजनीतिक विज्ञान की शोधार्थी कुमारी अनुपम ने द्वितीय और दयालबाग शिक्षण संस्थान की छात्रा कृति यादव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

कुलपति ने महाकवि गोपाल दास नीरज की कृति जिन मुश्किलों में मुस्कुराना हो मना, उन मुश्किलों में मुस्कुराना धर्म है… जिस वक़्त जीना गैर मुमकिन सा लगे, उस वक़्त जीना फर्ज है इंसान का से अपना वक्तव्य प्रारंभ किया। उन्होंने इस आयोजन को विद्यार्थियों के लिहाज से बेहद अहम बताया और जल्द ही केएमआइ के विद्यार्थियों, शिक्षकों व पूर्व विद्यार्थियों व विभूतियों के साथ जल्द ही एक बड़े कवि सम्मेलन का आयोजन करने का भरोसा दिया।
कवि शशांक प्रभाकर ने अच्छा करेगा काम, तो जन्नत में जाएगा, जो बुरा शख्श होगा, तो अदालत जाएगा। कविता से शुरू करते हुए एक के बाद एक शानदार लाइनें पढ़ीं, जिन्हें श्रोताओं ने खूब पसंद किया। मुख्य अतिथि प्रो. सोमठाकुर ने करते हैं हम मन से वंदन गीत की प्रस्तुति दी, इसके बाद मेरे भारत की माटी है चंदन और अबीर कविता गाई। संचालन डा. केशव शर्मा व आयोजन डा. नीलम यादव ने किया। कला संकाय डीन प्रो. यूसी शर्मा, केएमआई निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर, डा. प्रदीप वर्मा, डा. आदित्य प्रकाश, डा. वर्षा रानी, डा. राजेंद्र दबे, डा. संदीप कुमार, डा. प्रदीप कुमार आदि मौजूद रहीं।