आगरालीक्स…Agra News: पीसीओएस के बावजूद चार महीने के सही इलाज से गर्भवती हुई महिला, इससे पहले सालों तक नाउम्मीदी में जिये दंपति, पीसीओएस मंथ में डॉक्टर ने शेयर किया किस्सा ( Agra News: Pregnancy in PCOS, success story share by Dr. Shailja Sharma#Agra )
आगरा में इलाज को सही दिशा और सही डॉक्टर मिलना कितना जरूरी है यह आपको इस खबर से पता लग जाएगा।
आगरा में रोबोटिक और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कीं विशेषज्ञ, एम्स और सफदरजंग दिल्ली कीं पूर्व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलजा शर्मा कमला नगर के कावेरी कुंज में अपना क्लीनिक चलाती हैं। वे निसंतानता और पीसीओएस की भी एक्सपर्ट हैं। पीसीओएस मंथ में उन्होंने आगरा का एक ऐसा केस साझा किया है जो पीसीओएस से जूझ रहीं महिलाओं के लिए एक उम्मीद की तरह है।
डॉ. शैलजा ने बताया कि करीब चार महीने पहले शिकोहाबाद के पालम की रहने वाली 35 वर्षीय महिला उनसे मिलीं। बताया कि तीन साल पहले मासिक धर्म बंद हो गए थे। इसके बाद कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन सभी ने प्रीमेच्योर मेनोपॉज की बात कहते हुए बच्चे न हो सकने की बात कही। इसके बाद महिला को काफी मानसिक और शारीरिक कष्ट सहना पड़ा। वे तनाव में आ गईं।
किसी ने इस महिला और उसके पति को आगरा में डॉ. शैलजा शर्मा से परामर्श की सलाह दी। डॉ. शैलजा ने अपने अनुभव और जांचों के आधार पर पता लगाया कि यह मेनोपॉज नहीं बल्कि एडवांस पीसीओएस है। इसके चलते मासिक धर्म तीन साल से बंद थे।
मेनोपॉज और पीसीओएस में अंतर
डॉ. शैलजा ने बताया कि मेनोपॉज महिलाओं में हार्मोनल बदलाव की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो अंडाशय से हार्मोन का उत्पादन कम होने और मासिक धर्म बंद होने से परिभाषित होती है। जबकि
पीसीओएस एक हार्मोनल विकार है जिसके कारण मासिक धर्म अनियमित या बंद हो सकता है, बालों का बढ़ना, मुंहासे और अन्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
चार महीने इलाज के बाद गर्भधारण
डॉ. शैलजा ने बताया कि मनोपॉज में प्राकतिक रूप से गर्भधारण की संभावना नहीं होती है जबकि एडवांस पीसीओएस में रोग की पहचान, कुशल डॉक्टर और इलाज की सही दिशा से यह संभव है। हालांकि बावजूद इसके यह उपचार बहुत जटिल है क्योंकि एडवांस पीसीओएस एक जड़ो जमाव वाली स्थिति है। इस केस में चार महीने तक चले सही इलाज से महिला को नियमित रूप से मासिक धर्म आने लगा। इस बीमारी के चलते दंपत्ति को संतान नहीं हो रही थी। सही नियमित मासिक धर्म आने पर डॉक्टर के इलाज की सहायता से महिला गर्भवती हो गई।
हर पांच में से एक महिला में मिल रहे पीसीओएस के लक्षण
डॉ. शैलजा ने बताया कि आजकल महिलाओं में पीसीओएस की समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। अब कम उम्र की लड़कियां भी इस लाइफस्टाइल डिजीज का शिकार हो रही हैं। पीसीओएस में प्रजनन तंत्र के अंदर ओवरी में सिस्ट बन जाती हैं और इसकी वजह से महिलाओं को कई तरह की समस्याएं आती हैं जिनमें से अनियमित पीरियड्स आम है।
पीसीओएस के कारण आजकल महिलाओं को नैचुरली कंसीव करने में भी बहुत दिक्कतें आ रही हैं। ज्यादातर महिलाओं को लगता है कि पीसीओएस की वजह से वे नैचुरली कंसीव नहीं कर पाएंगी और उन्हें आईवीएफ करवा लेना चाहिए जबकि ऐसा नहीं है।
बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही सही पहचान और इलाज से इसे वहीं ठीक किया जा सकता है और इसे आगे गंभीर रूप में बदलने से बचाया जा सकता है। सही खान-पान व संतुलित जीवनशैली से इस बीमारी से बचा जा सकता है। डॉ. शैलजा शर्मा से अप्वाइंटमेंट या परामर्श के लिए मो. नंबर 9520243271 पर कॉल कर सकते हैं।