आगरालीक्स…आगरा के डीईआई में “स्कल्पचर कैंप 2022” एवं “फोक वॉल पेंटिंग वर्कशॉप” देश के विभिन्न प्रदेशों से आए कलाकार
डीईआई दयालबाग में चल रहा सृजनात्मकता का उत्सव
दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डी.ई.आई.) में दिनांक 19 से 28 दिसंबर 2022 तक आयोजित 10 दिवसीय सृजनात्मकता के उत्सव के अंतर्गत दो कार्यक्रमों “अनुपम प्रस्तर सृजन उत्सव” स्कल्पचर कैंप 2022 एवं “फोक वॉल पेंटिंग वर्कशॉप” का आयोजन किया गया है। यह दोनों कार्यक्रम डी.ई.आई. के ड्राइंग एंड पेंटिंग विभाग द्वारा संस्थान के मुख्य प्रांगण में आयोजित किए गए हैं। स्कल्पचर कैंप 2022 में चार आमंत्रित कलाकार देश के विभिन्न प्रदेशों से यहां आकर प्रतिभागिता कर रहे है, इनमें रवि मिश्रा, जयपुर, सुजीत कुमार करन, कोलकाता, संजय राजभर, एमएस यूनिवर्सिटी, वडोदरा और शिव कुमार वर्मा, वडोदरा सम्मिलित हुए हैं।
स्कल्पचर कैंप के प्रथम दिन 19 दिसंबर को सर्वप्रथम उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कला संकाय प्रमुख प्रोफेसर शर्मिला सक्सेना ने प्रस्तर अभिषेक कर विधिवत कैंप का उद्घाटन किया। विभागाध्यक्ष डॉ मीनाक्षी ठाकुर ने आमंत्रित कलाकारों का स्वागत किया, तत्पश्चात सभी आमंत्रित कलाकारों ने प्रस्तर पूजन कर अपनी प्रतिभागिता का श्रीगणेश किया। स्कल्पचर कैंप के मुख्य संरक्षक संस्थान के निदेशक प्रोफेसर प्रेम कुमार कालरा, संयोजिका डॉक्टर लकी टॉक, आयोजन सचिव डॉक्टर सोनिका और डॉक्टर अमित कुमार जौहरी है। मुख्य सहयोगी सुश्री गरिमा यादव है।

फोक वॉल पेंटिंग वर्कशॉप की संयोजिका डॉक्टर सोनिका ने बताया संस्थान के प्रांगण में सौंदर्यीकरण में वृद्धि हेतु ड्राइंग एंड पेंटिंग विभाग सतत रूप से अनेक रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन करता है। इसी श्रंखला में डी.ई.आई. के मुख्य प्रांगण की लगभग 50 मीटर लंबी दीवार पर भारतीय लोक कला व संस्कृति को दर्शाने वाली भित्ति चित्राकृतियों को मनभावन रूप में संयोजित किया जा रहा है। डीईआई की अनुपम शिक्षा नीति के अंतर्गत मूल्यपरक शिक्षा प्रदान करने हेतु विभिन्न कोर कोर्सेज जैसे भारतीय संस्कृति, विभिन्न धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन, ग्रामीण विकास एवं पर्यावरण शिक्षा आदि के अध्ययन को पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया गया है। वॉल पेंटिंग वर्कशॉप में चित्रित किए जा रहे चित्रों की विषय वस्तु उपरोक्त सभी कोर कोर्सेज से किसी ना किसी रूप में संबंधित है। कहीं भारत की सनातन संस्कृति को दर्शाने वाले श्री राम और श्री कृष्ण के जीवन प्रसंग सजीव हो उठे हैं तो कहीं सुदूर प्रदेशों की लोक संस्कृति की झांकी प्रस्तुत हो रही है।
यहां पश्चिमी बंगाल की कालीघाट चित्रकला और वहीं की संथाल जनजाति की प्राचीन जादोपटिया चित्रकला, मिथिला, बिहार की मधुबनी पेंटिंग, सुदूर केरल प्रदेश की कथकली नृत्य व नौका दौड़ की पेंटिंग, आंध्र प्रदेश की कलमकारी पेंटिंग, उड़ीसा की पट्टचित्र शैली और मध्य प्रदेश की गोंड चित्रकला को दर्शाने वाला लुभावना संसार संजोया जा रहा है। फोक वॉल पेंटिंग वर्कशॉप में डॉक्टर सोनिका एवं डॉ नमिता त्यागी के निर्देशन में डॉ अमित जौहरी, श्रीमती नीलम श्रीवास्तव एवं अन्य विभागीय सदस्यो के सहयोग से लगभग 20 शोधार्थी एवं 120 छात्राएं भित्ति चित्रण में सम्मिलित है। उपरोक्त दोनों कार्यक्रम विभागाध्यक्ष डॉ मीनाक्षी ठाकुर की देखरेख में संपादित किए जा रहे हैं।