आगरालीक्स…आगरा में सुधा सागर जी महाराज के मंगल प्रवेश पर उमड़ी ताजनगरी. छीपीटोला से एमडी जैन इंटर कॉलेज तक हर जगह हुआ भव्य स्वागत….
प०पू० 108 महामुनिराज विद्यासागर जी महाराज के परम पूज्य शिष्य सुधा सागर जी महाराज का विशाल शोभायात्रा छिपीटोला से प्रारम्भ होकर रावली कलेक्ट्रेट, धाकरान चौराहा, सुभाष पार्क, नालबंद चौराहा, राजा की मण्डी, सेन्ट जोन्स चौराहा होती हुयी एम. डी. जैन इण्टर कॉलेज के मैदान पर पहुँची। मुनिश्री की शोभायात्रा का जगह-जगह स्वागत हुआ और महाराष्ट्र. गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा से आये हुए कलाकारों ने अपनी सुन्दर प्रस्तुति से मुनिश्री की आगवानी की। आगरा नगर के समस्त महिला मंडल व युवा मंडल अपनी-अपनी पोशाकों में मुनिश्री की भक्ति करते हुए नृत्य करते हुए चल रहे थे। मुख्य अतिथि केन्द्रिय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रो० एस.पी.सिंह बघेल छिपीटोला से एम. डी. जैन तक मुनिश्री के साथ पैदल चले और धर्म सभा में भाग लिया।

जूलुस में केसरिया झण्डे लिए सैकड़ों की संख्या में जैन धर्मालम्बी भगवान महावीर के आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज व मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के जयकारों से वातावरण को गुंजायमान कर रहे थे। उत्तर भारत का सुप्रसिद्ध किशोर बण्ड सुर-मधुर जैन भजनों से वातावारण को संगीतमय कर रहा था। मुनिश्री की श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर एम. डी. जैन पहुँचने पर श्री दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति, आगरा दिगम्बर जैन शिक्षा समिति व आगरा दिगम्बर जैन परिषद द्वारा संयुक्त रूप से आरती उतारकर पाद पृक्षालन कर आगवानी की गयी। आगवानी करने वालों में प्रदीप जैन पीएनसी, अखिल बरौल्या, पुष्पेन्द्र जैन, व जितेन्द्र जैन, राकेश जैन पार्षद, जगदीश चन्द जैन, सुनील जैन ठेकेदार राकेश जैन पर्दे वाले मीडिया प्रभारी आशीष जैन मोनू, अमित सेठी मुख्य थे।

इस अवसर पर ललितपुर झांसी जयपुर सूरत अहमदाबाद नारेली बिजोलिया पारसनाथ आदि जगह से आए हुए भक्तों ने मुनि श्री को श्रीफल भेंट किया। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने कहा आज मेरा सौभाग्य है जो मुझे मुनि श्री के साथ चलने का अवसर मिला है मैं अपने आप को धन्य मानता हूं कि कहने को तो 542 सांसद हैं पर किसी के पास मुनि श्री सुधा सागर महाराज नहीं है यह वर्षा योग आगरा का नहीं बल्कि आगरा मंडल का है। मुनिश्री के पाद पृक्षालन करने का सौभाग्य पीएनसी परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन मनोज जैन द्वारा किया गया।

सभा को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि दिगम्बर साधु के चरण जहाँ पड़ते हैं वहाँ तीर्थ बन जाता है। दिगम्बर रहना कोई परम्परा नहीं है, श्रमण संस्कृति दिगम्बर जैन धर्म की आचार संहिता है। साधु का कार्य जगत को प्रकाशमान करना है। लोग जैन धर्म के साधु की चर्या को कष्ट समझते हैं लेकिन यह हमारी तपस्या है। परम्परा में कोई विचार नहीं करता, परम्परा जहाँ होती है वहाँ लोगों की बपौती हो जाती है। हमें परम्परा से हटकर जगत का कल्याण करना है। सूर्य का निकलना परम्परा नहीं है जगत में अन्धकार मिटाकर प्रकाश करना है। प्रकृति की परम्परा गर्मी करना, बरसात करना नहीं बल्कि प्रतिक्रिया है। धर्म कोई परम्परा नहीं, धर्म तो हमारा मैत्री समूह है। धर्म सभा में मुख्य रूप से नीरज जैन, पन्नालाल बैनाड़ा, हीरालाल बैनाड़ा, योगेश जैन, अक्षय जैन, सतीश चंद जैन, विमल जैन, मनीष जैन, राजेश जैन, अजय जैन, अंकुश जैन, राकेश जैन, शैलेंद्र जैन अरुण जैन छोटू सुभाष जैन अनिल जैन बजाज सुनील जैन आदि प्रमुख थे