आगरालीक्स…लंका जारि असुर दल मारे…आगरा की रामलीला मेें हुआ लंका दहन. रामलीला मैदान में तीन मंजिली सोने की लंका धू-धू कर जल उठी
उत्तर भारत की प्रमुख श्रीराम लीला में शनिवार को लंका दहन देख कर सभी ने श्रीराम के जयघोष किये। इस बार सोने की लंका तीन मंजिल ऊंची बनाई गई थी, वहीं अशोक वाटिका ने भी दर्शकों को आकर्षित किया। सामाजिक संगठन भी बढ़चढ़ कर भाग ले रहे हैं।
रामलीला मैदान में लंका दहन की लीला प्रमुख थी। जैसे ही दर्शक मैदान में पहुंचे, उनकी निगाह सोने की लंका पर पड़ी। बहुत सारे दर्शकों में तो लंका को पास जाकर देखने की होड़ लग गई। क्योंकि ऐसी लंका पहली बार रामलीला मैदान में बनाई गई थी। इसी प्रकार अशोक वाटिका में जानकी जी को बैठा देख दर्शक भी, उनके पास जाए बिना नहीं रहे।

मंच और उसके दोनों ओर लगी एलईडी स्क्रीन पर लीला का मनमोहक मंचन दर्शक देखकर मंत्रमुग्ध थे। लीला में दिखाया कि समुद्र के किनारे श्रीराम की सेना पहुंच जाती है। सुग्रीव द्वारा शक्ति का अहसास कराने पर हनुमान जी भगवान श्रीराम का नाम लेकर समुद्र पार करने के लिए छलांग लगाते हैं। लंका में अशोक वाटिका पहुंच कर वे सीता जी की खोज कर लेते हैं। राम दूत होने का विश्वास दिलाने के लिए वे मुद्रिका भी माता सीता की गोद में गिरा देते हैं। उसके बाद उन्होंने अशोक वाटिका उजाड़ दी। विभिन्न दृश्यों के मंचन के बाद रावण द्वारा हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने की लीला का मंचन होता है।
रावण ने हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया, जिससे हनुमान जी ने कुछ ही देर में रावण की सोने की लंका को जलाकर उसका अहंकार तोड़ दिया। तभी मैदान में गूंज उठता है-लंका जारि असुर दल मारे, रामचंद के काज संवारे।
मैदान में बनी तीन मंजिल ऊंचाई की सोने की लंका में दो द्वारपाल के पुतले भी इस बार बनाए थे, लंका दहन में वे भी जल गए। लंका दहन होते ही वहां खुशी की लहर छा गई। मैदान में बैंड बाजों ने जोशीली धुन बजाई। पूरा मैदान श्रीराम के जयघोषों से गूंज उठा।

यह दृश्य देखकर रामलीला आयोजन स्थल पर मौजूद लोग हनुमान जी और जय श्री राम के जयकारे लगाते हैं। हनुमान जी ने अपने अपमान का बदला ले लिया था। गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई भी व्यास पीठ से सुनाई गई-
साधु अवग्या कर फलु ऐसा। जरइ नगर अनाथ कर जैसा।
जारा नगरु निमिष एक माहीं। एक बिभीषन कर गृह नाहीं॥
साधु के अपमान का यह फल है कि लंका अनाथ के नगर की तरह जल रही थी। हनुमान्जी ने एक ही क्षण में सारा नगर जला डाला। एक विभीषण का घर नहीं जलाया था।