आगरालीक्स…आगरा में शहीद हेमू कालानी को दी श्रद्धांजलि. 102वें जन्मदिवस पर गूंजे अमर शहीद के जयकारे. तहसील चौराहा पर हेमू कालानी के सौदर्यीकृत प्रतिमा स्थल का किया लोकार्पण
अमर शहीद हेमू कालानी का 102वां जन्मदिन बुधवार को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सिंधी युवा मंच व पूज्य सिंधी जनरल पंचायत शाहगंज की ओर से तहसील चौराहा स्थित प्रतिमा स्थल पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। साथ ही तहसील चौराहा स्थित शहीद हेमू कालानी की प्रतिमा स्थल व आस-पास किए गए सौन्दर्यीकरण का लोकार्पण करते हुए मेयर हेमलता दिवाकर ने आयोजन समिति व वरिष्ठ समाजसेवी हेमन्त भोजवानी के प्रयासों की सराहना की।
अमर शहीद हेमू कालानी के बलिदान को याद करते हुए महापौर हेमलता दिवाकर ने कहा कि आज के युवाओं को उनके जीवन से सीख लेनी चाहिए। जीवन केवल मोबाइल में उलझे रहने का नाम नहीं है। देश भक्ति से बढ़कर और कुछ नहीं है। वहीं कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने वीर सपूत हेमू कालानी के साथ ही अमर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया। कहा आज हम आजादी की सांस ले रहे हैं, लेकिन यह आजादी हमें आसानी से हासिल नहीं हुई है। अमर शहीद हेमू कालानी की तरह ही अनगिनत वीर सपूतों ने प्राणों को बलिदान दिया है। इससे पूर्व तहसील चौराहा स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया और मिठाई बांटी गई। वक्ताओं ने वीर शहीद से जुड़े प्रसंगों को सुनाया और भावी पीढ़ी को उनसे सीख लेने की अपील की। अमर शहीद भगत सिंह को भी याद किया।
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में शहीद हेमू कालानी की गिनती उन अमर शहीदों में होती है, जिन्होंने अपने बलिदान से युवाओं में देश की स्वाधीनता का बिगुल बजाया। उनका जन्म 23 मार्च 1923 को वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सख्खर में हुआ था। छात्र जीवन से ही उन्होंने सिंधी समाज के उदय और भारतीय स्वाधीनता संग्राम में भाग लिया। उन्होंने स्वराज सेना का गठन कर अंग्रेजों को ललकारा। हथियारों से लदी अंग्रेजी की रेलगाड़ी को पटरी पर उतारने की कोशिश में उन्हें गिरफ्तार किया गया। महज 19 साल की उम्र में अंग्रेजों ने 21 जनवरी 1943 को उन्हें फांसी दे दी।