आगरालीक्स…आगरा में परिनिर्वाण दिवस पर बाबा साहब को किया नमन. विवि के सावित्रीबाई फुले भवन, 100 क्षमता छात्रावास में हुई श्रद्धांजलि सभा…
संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर शनिवार को विवि के सावित्रीबाई फुले भवन, 100 क्षमता छात्रावास में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह छात्रावास डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा तथा समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त सहयोग से संचालित है। छात्रावास में निवास करने वाली सभी बालिकाएँ विश्वविद्यालय के विभिन्न संस्थानों एवं विभागों में अध्ययनरत हैं। संचालन असिस्टेंट वार्डन डॉ. रत्ना पांडेय ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण से की गई, जिसे अनिल सोनी, सदस्य—निगरानी समिति, समाज कल्याण मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, द्वारा किया गया। उन्होंने बाबा साहब के प्रति अपनी गहन श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय और समानता के लिए उनका संघर्ष आज भी हर पीढ़ी को प्रेरित करता है।सभा में जीआर प्रजापति, जिला समाज कल्याण अधिकारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि “बाबा साहब का जीवन संघर्ष, समर्पण और विद्वता का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए जो परिवर्तनकारी भूमिका निभाई, वह सदैव अनुकरणीय रहेगी। छात्राओं को चाहिए कि वे शिक्षा को अपना सर्वोच्च साधन बनाते हुए आगे बढ़ें।” कार्यक्रम में निर्मला दीक्षित, पूर्व सदस्य, महिला आयोग, ने कहा कि “बाबा साहब ने महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा और गरिमा की जो नींव रखी, उसी के कारण आज भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण के नए आयाम स्थापित हुए हैं। उनकी शिक्षाएँ विशेष रूप से युवतियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और उन्हें जीवनभर मार्गदर्शन देती रहेंगी।”
इसके पश्चात डॉ. रत्ना पांडेय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि “बाबा साहब केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वे भारत के सामाजिक परिवर्तन के सबसे सशक्त प्रतीक थे। शिक्षा, आत्मसम्मान और समान अवसरों के लिए उनका चिंतन आज भी उतना ही प्रासंगिक है और युवा वर्ग को उनसे निरंतर प्रेरणा लेनी चाहिए।”कुलपती प्रोफ़ेसर आशु रानी ने कहा कि “बाबा साहब को केवल आज ही नहीं, बल्कि प्रतिदिन और जीवन के हर क्षेत्र में याद किया जाना चाहिए। उनके सिद्धांतों और आदर्शों को यदि समाज अपनाए, तो वास्तविक समानता और प्रगति संभव है।” सभा में लगभग 90 छात्राएँ एवं स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर बाबा साहब को नमन किया और उनके सामाजिक दृष्टिकोण, संवैधानिक मूल्यों एवं मानवीय आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।