आगरालीक्स…#agra में अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन बनना शुरू हो गए हैं. आरबीएस कॉलेज पर भी अंडरग्राउंड स्टेशन का शुरू हुआ काम. ताजमहल से आरबीएस तक 8 किमी. लंबी सुरंग से गुजरेगी मेट्रो…जानें कौन—कौन से हैं अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन #agra #agrametro #agrametroproject #metroinagra #undergroundmetrostation #undergroundmetrostationagra #agraundergroundmetrostation #agracity #upmetro #upmrc
आगरा में अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन के लिए काम तेजी से किया जा रहा है. तीन एलिवेटेड स्टेशन ताज पूर्वी गेट, बसई और फतेहाबाद रोड के बाद अब 7 अंडरग्राउंड स्टेशनों के लिए काम किया जा रहा है. ताजमहल से लेकर आरबीएस कॉलेज तक 7 अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे. मेट्रो का यह काम आरबीएस कॉलेज पर भी शुरू कर दिया है. इससे पहले राजा की मंडी स्टेशन पर खुदाई शुरू हो गई है. आरबीएस कॉलेज पर अब मेट्रो के बैरियर लगा दिए गए हैं और अंडरग्राउंड स्टेशन के लिए खुदाई शुरू कर दी गई हे. इससे पहले आगरा फोर्ट पर इसका काम पहले ही शुरू हो चुका है.
ये हैं सात अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन
ताजमहल
आगरा फोर्ट
जामा मस्जिद
आगरा कॉलेज
एसएन मेडिकल कॉलेज
राजा की मंडी
आरबीएस कॉलेज
ताजमहल से आरबीएस कॉलेज तक खुदेगी सुरंग
आगरा मेट्रो के पहले और दूसरे दोनों कॉरीडोर में अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे. इसके लिए सुरंग खोदी जाएगी. ताजमहल से आरबीएस कॉलेज तक 7.93 किलोमीटर लंबी सुरंग खोदी जानी है. इसके लिए दो कंपनियों ने मिलकर टेंडर लिए हैं. सुरंग की खोदाई के लिए चार टनल बोरिंग मशीन का इस्तेमाल किया जाएगा.

तेज गति के साथ जारी हैडायफ्राम वॉल का निर्माण
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन द्वारा टॉप डाउन प्रणाली के तहत सभी 7 भूमिगत मेट्रो स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है. इस प्रणाली में बिना शटरिंग का प्रयोग किए सभी भूमिगत स्टेशनों के दोनों तलों की छत का निर्माण होगा. फिलहाल, प्रायोरिटी कॉरिडोर के भूमिगत मेट्रो स्टेशन आगरा फोर्ट पर डायफ्राम वॉल का निर्माण किया जा रहा है, जबकि ताजमहल एवं जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर डी वाल के निर्माण को लेकर तैयारी की जा रही है.
टाप डाउन प्रणाली के तहत बनेंगे स्टेशन
यूपी मेट्रो के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने बताया कि आगरा मेट्रो के सभी भूमिगत मेट्रो स्टेशनों का निर्माण टॉप डाउन प्रणाली के तहत किया जा रहा है। कुमार केशव ने बताया कि भूमिगत स्टेशनों के निर्माण की अन्य प्रणालियों की तुलना में टॉप डाउन प्रणाली बेहद किफायती है, इस प्रणाली में समय की बचत के साथ ही लागत भी कम आती है। उन्होंने बताया कि टॉप डाउन प्रणाली में पहले स्टेशन के कॉन्कोर्स लेवल एवं उसके बाद प्लेटफॉर्म लेवल का निर्माण किया जाता है। इस प्रणाली में छत की कास्टिंग के लिए शटरिंग का प्रयोग नहीं किया जाता बल्कि भूमि को समतल कर शटरिंग की तरह प्रयोग किया जाता है।
कैसे होता है भूमिगत स्टेशन का निर्माण
भूमिगत स्टेशन के निर्माण के लिए सबसे पहले स्टेशन परिसर हेतु चिन्हित भूमि पर अलग-अलग जगहों से बोरिंग कर मिट्टी के नमूने लिए जाते है. इन नमूनों की जांच के बाद स्टेशन बॉक्स (स्टेशन परिसर का कुल क्षेत्रफल) की मार्किंग की जाती है. इसके बाद स्टेशन परिसर की डॉयफ्राम वाल (बाउंड्री वॉल) के निर्माण के लिए गाइडवॉल बनाई जाती है. गाइड वॉल का प्रयोग डी वॉल को सही दिशा देने के लिए किया जाता है, डी वॉल के निर्माण के बाद इसे हटा दिया जाता है.
गाइड वॉल के निर्माण के बाद एक खास मशीन से डी वॉल की खुदाई की जाती है. खुदाई पूरी होने का बाद उस जगह में सरियों का जाल (केज) का डाला जाता. इसके बाद कॉन्क्रीट डाल कर डायफ्राम वॉल का निर्माण किया जाता है. टॉप डाउन प्रणाली के तहत एक बार जब स्टेशन परिसर की डायफ्राम वाल का निर्माण पूरा हो जाता है, तो फिर ऊपर से नीचे की ओर निर्माण कार्य प्रारंभ होते हैं. टॉप डाउन प्रणाली में सबसे पहले ग्राउंड लेवल पर भूमि को समतल कर कॉन्कोर्स की छत का निर्माण किया जाता है। इस दौरान ग्राउंड लेवल की स्लैब में कई जगहों पर खुला छोड़ा जाता है. जब प्रथम तल (कॉन्कोर्स) की छत बनकर तैयार हो जाती है, तो खाली जगहों से मशीनों के जरिए मिट्टी की खुदाई शुरू की जाती है. इसके बाद कॉन्कोर्स तल की खुदाई पूरी हो जाने पर फिर मिट्टी को समतल कर प्लेटफॉर्म लेवल की छत का निर्माण किया जाता है. इस स्लैब में भी कुछ खाली जगह छोड़ी जाती हैं, जहां से फिर मशीनों के जरिए प्लेटफॉर्म लेवल की खुदाई कर स्टेशन परिसर का निर्माण किया जाता है.