आगरालीक्स… (7 February 2022 Agra News) आगरा की ग्रामीण विधानसभा सीट हाईप्रोफाइल बनी हुई है। इस पर यूपी ही नहीं उत्तराखंड की भी नजर बनी हुई है। भाजपा प्रत्याशी की जीत प्रतिष्ठा का भी प्रश्न है लेकिन मुकाबला आमने-सामने का न होकर त्रिकोणात्मक हो गया है।
परिसीमन के बाद आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट पर यह तीसरा चुनाव है, पिछले दो चुनाव में भाजपा व बसपा एक-एक बार विजयी रही है।
राज्यपाल पद से इस्तीफा दे चुनावी जंग
इस बार इस सीट से भाजपा प्रत्याशी बेबी रानी मौर्य उत्तराखंड के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर चुनाव मैदान में उतरी हैं। भाजपा ने इस सीट से हेमलता दिवाकर का टिकट काटकर बेबी रानी मौर्या पर भरोसा जताया है। भाजपा को इस सीट से अपने परंपरागत वैश्य, ब्राह्मण, वोटों के अलावा दलित रजक समाज के वोटों का अपना गणित है।
वोटों को सहेजना बेबी रानी के लिए चुनौती
भाजपा प्रत्याशी बेबी रानी मौर्य व्यवहारिक कुशलता के रूप में अपनी अलग पहचान रखती हैं। आगरा की मेयर भी रह चुकी हैं। संघ और संगठन का भी वरदहस्त है। लेकिन चुनाव की बात आती है तो वर्ष 2007 में एत्मादपुर विधानसभा सीट पर भाजपा की बेबी रानी मौर्या दूसरे स्थान पर रही थीं। इस बार बेबी रानी मौर्या की आगरा ग्रामीण सीट से भाजपा की जीत प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है।
गठबंधन प्रत्याशी ने जाटव समाज में लगाई गांठ
सपा-रालोद गठबंधन से महेश कुमार चुनाव मैदान में हैं। महेश कुमार जाटव समाज से आते हैं। इस सुरक्षित सीट पर जाटव समाज की संख्या भी अच्छी खासी है, जो हार-जीत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। महेश के गठबंधन से मैदान में उतरने से जाटव समाज के वोट का बंटवारा होना तय है, जो महेश के पक्ष को मजबूत करता है। सपा-रालोद का मुस्लिम और जाट वोट भी गठबंधन प्रत्याशी की स्थिति को मजबूत कर रहा है। पिछले चुनाव में रालोद से नारायण सिंह सुमन 17,446 वोट लेकर चौथे स्थान पर रहे थे।

हाथी भी चल रहा है मस्त चाल, पर चुनौती कम नहीं
बसपा से किरण प्रभा केसरी मैदान में हैं। बसपा इस सीट से पहला चुनाव जीत चुकी है। बसपा को अपने परंपरागत वोटों पर भरोसा है लेकिन जाटव समाज से गठबंधन का प्रत्याशी उनके कुछ वोटों को काट सकता है लेकिन फिर भी बसपा अपने वोटों को पक्का मानकर चलती है, जिसका उसे फायदा भी मिलेगा। इस सीट पर बसपा को मुस्लिम वोटों की भी खासी उम्मीद है क्योंकि रुझान बदलने पर मुस्लिम वोट उसके खेमे में आ सकता है। पिछले चुनाव में भाजपा जीती जरूर थी बसपा प्रत्याशी 64,591 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। बसपा को इस बार दिवाकर समाज के वोटों पर आस बनी हुई है।
कांग्रेस करेगी जीत का गुणा-भाग बिगाड़ने का काम
कांग्रेस से उपेंद्र सिंह चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस प्रत्याशी दूसरों दलों का गुणा-भाग बिगाड़ने का काम कर सकते हैं। कांग्रेस के अपने वोट हैं। मुस्लिम वोटों की भी आस बनी है लेकिन सबसे बड़ी कांग्रेस के लिए राहत की बात यह है कि योगी-मोदी की लहर में पिछले चुनाव में कांग्रेस के उपेंद्र सिंह 31,312 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस प्रकार वह कुछ वोटों का उलट-फेर करते नजर आ रहे हैं।
आगरा ग्रामीण सीट से विजयी सूरमा
वर्ष 2017 हेमलता दिवाकर भाजपा
वर्ष 2012 कालीचरण सुमन बसपा
खास-खास
ग्रामीण विधानसभा सीट पर मतदाता 4,23,456
आगरा ग्रामीँण पर युवा मतदाता 3738
लड़के इस चुनाव में मतदान करेंगे 1944
लड़कियां इस चुनाव में मतदान करेंगी 1794