आगरालीक्स…सबके अपने-अपने बहाने हैं, आगरा में चाय के दीवाने हैं, टपरियों पर पी जाने वाली चाय के अब लग्जरी ठिकाने हैं, आगरा के युवा टी-काॅफी कैफे खोलकर बदल रहे अपनी किस्मत, चाय सुट्टा बार, ईको फ्रेंडली चाय और तंदूरी कैफे जैसे अजब-गजब नाम
आगरा में सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट खूब वायरल की जा रही है।
चाय के दीवानों का एक काम बड़ा सही है….। ठंड लग रही है चाय बना लो, बारिश हो रही है चाय बना लो, मन नहीं लग रहा चाय बना लो, थक गए चाय बना लो, बोर हो गए चाय बना लो, काम बहुत है चाय बना लो, बाजार से आए हैं चाय बना लो, फ्री बैठे हैं चाय बना लो, सुबह हो गई चाय बना लो, खाने के बाद चाय बना लो, शाह हो गई चाय बना लो, कुछ हो गया चाय बना लो, कुछ नहीं भी हुआ चाय बना लो।
इस पोस्ट को पढ़ने के बाद हमने भी सोचा कि चलो एक नजर आगरा की चाय पर डाली जाए। आफिस से निकलकर थोड़ा आगे बढ़े ही थे कि नजर एक चाय की टपरी पर पड़ी देखा कि कुछ लोग चाय की चुस्कियों का आनंद उठा रहे हैं। थोड़ा और आगे बढ़े तो टपरी पर बिकने वाली इसी चाय का कल्चर कुछ बदलता हुआ दिखा। इस बार एक बड़ा ही शानदार चाय कैफे सामने था। स्कूल-काॅलेज के कुछ लड़के लड़कियां यहां मूड़ों पर बैठकर चाय का आनंद उठा रहे हैं। इन्हीं लड़के-लड़कियों से बात करने पर पता चला कि आगरा में ही चाय सुट्टा बार, पनौती चाय और ईको फ्रेंडली चाय कैफे जैसे भी कई ठिकाने हैं। ईको फ्रेंडली चाय यानि आप चाय पीएं और कुल्हड़ को खा जाएं। हैरान हो गए न ? दरअसल यह आइसक्रीम काॅन के बने हुए कुल्हड़ होते हैं जिनमें चाय पीने के बाद आपको कुल्हड़ या प्लास्टिक गिलास की तरह कहीं फेंककर गंदगी फैलाने की जरूरत नहीं है बल्कि आइसक्रीम काॅन को खा सकते हैं। हंसी-मजाक के साथ कुछ युवाओं ने बताया कि पनौती चाय को दो दोस्तों ने शुरू किया था, जिन्हें अक्सर पनौती कहा जाता था, क्योंकि वे अक्सर कामों में गड़बड़ी कर देते थे।
इसके बाद हमने कई चाय कैफे पर जाकर वहां के संचालकों से बात की। पता लगा कि हमारा शहर चाय के बिना तो नहीं चल सकता, लेकिन चाय पीने का कल्चर अब समय के साथ बदल गया है। पहले जो चाय ठेल-ढकेल और टपरियों पर पी जाती थी वही चाय अब महंगे और लग्जरी कैफे में पी जा रही है। इसे ऐसे समझें कि इन कैफेज में अब डेटिंग से लेकर, बिजनेस नेटवर्किंग और मीटिंग गरमागर्म चाय के साथ डिस्कस की जा रही है। कैफे के लुक और ऐम्बियंस पर हुए काम का असर और मेन्यू में इस कारोबार पर आया अंतर साफ नजर आता है। युवा ऐसी चीजों को जोड़कर इस काम को कर रहे हैं जो लोगों को आकर्षित करती हैं।

कुल मिलाकर लाला जी और मुन्ना की चाय से बात अब आगे निकल आई है और आगरा में चाय का कारोबार माॅडर्न हो चुका है। आपके पास ब्लैक टी, आइस टी, लेमन टी, अदरक चाय, मसाला चाय, स्पेशल चाय जैसे कई आॅप्शन हैं। संजय प्लेस में गुप्ताज टी है। यहां चाय पीतल के बर्तन में बनाई जाती है और यहां की विशेषता है कि चाय के लिए हर बार चाय बनने के बाद बर्तन को अच्छी तरह धोया जाता है, पुरानी पत्ती को फेंक कर एक नामी ब्रांड की नई चाय पत्ती ही इस्तेमाल की जाती है। संचालक अमित गुप्ता बताते हैं कि चाय के बिजनेस को अगर आप क्रिएटिविटी के साथ यूनिक तरीके से शुरू करते हैं तो इसे सबकी पसंदीदा बना सकते हैं, इससे यह आपको बहुत अच्छा प्राॅफिट भी देगी। सिकंदरा क्षेत्र में सिनर्जी प्लस हाॅस्पिटल के सामने हाईवे पर तंदूरी चाय कैफे है। यहां की विशेषता है कि चाय के कुल्हड़ को पहले तंदूर में अच्छी तरह गर्म किया जाता है ताकि चाय के अंदर तंदूर का फ्लेवर आ जाए। यहां तंदूरी चाय के साथ ही मसाला चाय, इलायची चाय, अदरक चाय और देसी चाय 15 से 25 रूपये में उपलब्ध है। इसके अलावा टेबल पर आमने-सामने बैठने की व्यवस्था है और सामने स्नेक्स का एक मेन्यू भी रखा जाता है, जिसमें बन मसका और ब्रैड मक्खन जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। प्रबंधक आयुष पंडित बताते हैं कि अगर आप बिजनेस को ग्रो करना चाहते हैं तो आज के समय में अपने ग्राहक को कुछ स्पेशल सर्विस और वैराइटी देनी होगी। उनका कैफे इसी उद्देश्य की पूर्ति करता है।

हालांकि ऐसा कहा जाता है कि चाय नुकसान भी करती है। इसे लेकर हमने शहर कीं जानी-मानीं डायटीशियन डाॅ. रेणुका डंग से बात की तो उनका कहना था कि जरूरत से अधिक तो कोई भी चीज नुकसान ही करेगी, लेकिन ऐसा नहीं है कि सीमित मात्रा में भी यह आपको नुकसान ही करे। बल्कि इसके कई फायदे हैं क्योंकि एंटी आॅक्सीडेंट होने की वजह से यह शरीर से कई तरह के विषैले पदार्थों को बाहर और कई तरह के कैंसर से बचाव करती है। हां चाय के साथ इतना जरूर ध्यान रखें कि मीठा कम रखें और दूध भी कम ही रखें। अगर आप लेक्टोज टोलरेंट हैं तो चाय आपके लिए बिलकुल भी नहीं है। इसी तरह अगर आप स्पीप एप्निया या एंग्जाइटी जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं तो भी आपको चाय से परहेज करना चाहिए। हमारी यहां तो परंपरा भी है कि जब हम किसी को अपने घर या दफ्तर बुलाते हैं तो यही कहते हैं ‘चाय पर आओ कभी…’।