आगरालीक्स…आगरा का ऐतिहासिक गणगौर मेला कल से। युवाओं में मेले का क्रेज। हीरे-जवाहरात और सोने के आभूषणों से सजती थीं गणगौर…
गोकुलपुरा और मोतीकटरा में होता है आयोजन
आगरा के गोकुपुरा और मोतीकटरा में गणगौर का दो दिवसीय मेला 11 अप्रैल से शुरू होगा। मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। गणगौर की प्रतिमाओं की साफ-सफाई, वस्त्र और और आभूषण तैयार कर श्रंगार का काम शुरू कर दिया गया है।
भव्य गणगौर कई स्थानों पर रखी जाती हैं
गोकुलपुरा में गणगौर की करीब दो दर्जन से ज्यादा प्रतिमाएं प्रमुख प्रमुख गलियों और मोहल्लों के बाहर रखी जाती हैं, जिनका लोग दर्शन करते हुए जाते हैं। इनमें कुछ गणगौर प्रतिमाएं काफी पुरानी और आकर्षक हैं।
गणगौर की निकाली जाती है शोभायात्रा
गणगौर प्रतिमाओं को पहले दिन रात्रि में बैंड-बाजों के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमे पानी पिलाना कहते हैं, जो पूरे क्षेत्र का चक्कर लगाती हुई वापस अपने स्थान पर कहती हैं। इन प्रतिमाओँ को मंगलेश्वर तालाब होकर ले जाता है।
गोकुपुरा के बुजुर्गों का बताते हैं कि गणगौर प्रतिमाओँ को हीरे-जवाहरात और सोने के आभूषण पहनाए जाते थे। इसके लिए गली-मोहल्ले के प्रमुख लोग अपने और पड़ोस के घरों की महिलाओं के गहनों को लाते थे और उन्हे पहनाया जाता था।
हीरे-जवाहरात से सजती थी गणगौर
महिलाएं भी अपने आभूषण देने में हिचकती नहीं थीं क्योंकि उनके आभूषण शिव-पार्वती के स्वरूप गणगौर को पहनाए जाते थे, जिससे वह गौरवान्वित महसूस करती थीं। अब समय बदलने पर यह रिवाज खत्म हो गया है।
मोती कटरा की गणगौर का भी है खास महत्व
गोकुलपुरा के साथ मोतीकटरा की गणगौरों का भी महत्व है लेकिन समय के साथ यहां का मेला कुछ जरूर कम हो गया है लेकिन इसका महत्व कम नहीं हुआ है।