आगरालीक्स.. ( Jagdishpura Land Case Agra ) ..आगरा की इस खबर में सस्पेंस है, थ्रिलर है और जिंदा व्यक्ति के अंतिम संस्कार की फर्जी श्मशान घाट की रसीद। पर्दे की पीछे माननीय और सामने गरीब और बिल्डर। पढ़े जगदीशपुरा जमीन कांड की चौंकाने वाली पूरी रिपोर्ट।
आगरा के जगदीशपुरा में बैनारा फैक्ट्री है, इसी फैक्ट्री के पास चार बीघा जमीन है, यह जमीन टहल सिंह की थी। टहल सिंह लुधियाना, पंजाब में रहने लगे। जमीन के रेट बढ़ते गए और कोई वारिसाना हक जताने वाला नहीं था। यहीं से जगदीशपुरा कांड की नींव रखी गई, जमीन पर कई माननीय और बिल्डरों की नजर थी लेकिन जमीन का वारिस कोई नहीं था।
2019 से शुरू हुआ खेल
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, देहात क्षेत्र के एक माननीय के बेटे ने 2019 में चार बीघा जमीन की वारिस के बनाने के लिए यमुना ब्रिज के रहने वाले धर्मेंद्र वर्मा को सूत्रधार बनाया, उसने उमा देवी को सामने लेकर आया, उमा देवी काशीराम आवास, कालिंदी विहार में रहती थी। उमा देवी को जसवीर सिंह की पत्नी बताते हुए दस्तावेज तैयार कराए गए। इसके बाद जसीवर सिंह को टहल सिंह का बेटा साबित करने के लिए दस्तावेज तैयार हुए। वारिसाना हक उमादेवी को दिलवाने के लिए टहल सिंह और जसवीर सिंह को मृत दिखाया गया। इसके लिए फर्जी म्रत्यु प्रमाण पत्र बनवाए गए, श्मशान घाट की अंतिम संस्कार की फर्जी रसीद तैयार की गईं।
उमा देवी को बनाया गया चार बीघा जमीन का वारिस
जिस चार बीघा जमीन के लिए पूरी कवायद की गई, उसमें रवि कुशवाहा अपने परिवार के साथ वर्षों से रह रहा था। उसे भी साजिश में शामिल किया गया। अब पिक्चर में मोहित कुशवाहा उर्फ किशन मुरानी निवासी फ्री गंज की एंट्री हुई, उसने खुद को उमा देवी का भतीजा बताया और उमा देवी को वारिसाना हक दिलवाने के लिए आवेदन किया। जीवनी मंडी के रहने वाले राजू ने खुद को उमा देवी का भाई बताया और वह भी साजिश में शामिल हो गया। इस तरह उमा देवी को चार बीघा जमीन का वारिस बनवा दिया गया, इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों से साठ गांठ की गई।
संस्पेंस और भी वारिस बनने के बाद कब्जे को लेकर शुरू हो गई जंग
चार बीघा जमीन पर कई बिल्डर और माननीय की नजर थी, उन्होंने जमीन पर कब्जा लेने के लिए एक अलग तरह की साजिश रची। चार बीघा जमीन पर रवि कुशवाहा और उनका भाई शंकरिया कुशवाहा परिवार के साथ रह रहे थे, इन दोनों पर शराब की अवैध बिक्री करने के आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया। कब्जा जाता देख उमा देवी का पक्ष सक्रिय हुआ और डीजीपी तक मामला पहुंच गया है कि पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर फर्जी मुकदमे दर्ज किया गया, उमा देवी की तहरीर पर जगदीशपुरा के तत्कालीन एओ, बिल्डर कमल चौधरी, उनके बेटे धीरू चौधरी सहित 12 15 पर मुकदमा दर्ज किया गया। एओ सहित तीन को जेल भेज दिया गया, बिल्डर और उनके बेटे को हाईकोर्ट से अरेस्ट करने पर स्टे मिल गया।
टहल सिंह निकले जिंदा, बदल गई पूरी कहानी
यह पूरा मामला चल रहा था इसी बीच टहल सिंह के बारे में पता चला कि वह जिंदा हैं। लुधियाना में रह रहे टहल सिंह आगरा आए और बयान दिए कि वे जिंदा हैं, जसवीर सिंह उनके बेटे नहीं साला है, वे उमा देवी को जानते तक नहीं। कोर्ट में बयान दर्ज किए गए, एसआईटी ने जांच की, इसके बाद परत दर परत खुलती गई। डीसीपी सिटी सूरज राय के अनुसार, जांच में एसआईटी को पता चला कि उमा देवी, रवि कुशवाहा, शंकरिया, मोहित कुश्वाहा, धर्मेंद्र वर्मा और राजू ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और फर्जी तरह से वारिस बने। इन सभी छह को जेल भेज दिया है।