आगरालीक्स…यूपी चुनाव में जीत भले ही भाजपा की रही हो, लेकिन सोशल मीडिया अखिलेश यादव ट्रेंड कर रहे हैं. जानिए इनके राजनीतिक फैमिली बैकग्राउंड के बारे में…
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के नतीजे घोषित हो चुके हैं. योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ एक बार फिर से यूपी में सत्ता बनाने जा रही है तो वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी भले ही हार गई हो लेकिन इस चुनाव में सपा का वोट प्रतिशत भी बढ़ा है और सपा की सीटें भी. खुद अखिलेश यादव ने भी शुक्रवार सुबह ट्वीट करके कहा कि — उप्र की जनता को हमारी सीटें ढाई गुनी व मत प्रतिशत डेढ़ गुना बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद! हमने दिखा दिया है कि भाजपा की सीटों को घटाया जा सकता है। भाजपा का ये घटाव निरंतर जारी रहेगा।आधे से ज़्यादा भ्रम और छलावा दूर हो गया है बाकी कुछ दिनों में हो जाएगा। जनहित का संघर्ष जीतेगा! इसके अलावा एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि सपा-गठबंधन के जीते हुए सभी विधायकों को हार्दिक बधाई! सभी नये विधायक जनता की सेवा व सहायता करने की ज़िम्मेदारी शत-प्रतिशत निभाएं! उस हर एक छात्र, बेरोज़गार युवा, शिक्षक, शिक्षामित्र, महिला, पुरानी पेंशन के समर्थक, किसान, मज़दूर और प्रोफेशनल को धन्यवाद जिसने हममें विश्वास जताया. शुक्रवार सुबह अखिलेश यादव के इस ट्वीट के बाद अखिलेश यादव सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं

अकेले संभाली कमान
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बार चुनाव की कमान अपने हाथ में ही संभाली रही. हालांकि उनका गठबंधन रालोद से था लेकिन पूर्वांचल सहित कई जिलों में अखिलेश यादव ने एक दिन में पांच—पांच रैलियां व जनसभाएं तक की हैं. यही कारण है कि इस बार सपा को भाजपा के साथ जोरदार टक्कर देने वाला बताया जा रहा था. हालांकि भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल किया और सपा शुरू से ही उसके सामने टिक नहीं सकी.
सपा को इतने मिले वोट
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा को यूपी चुनाव 2022 में इस बार कुल 38,051,721 वोट मिले. यानी बीजेपी के खाते में 41.3 प्रतिशत वोट आए. वहीं दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी रही. सपा को इस चुनाव में कुल 29,543,934 वोट मिले. सपा का वोट प्रतिशत 32.1 रहा.
जानिए अखिलेश यादव के बारे में
अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री रह चुके हैं. इससे पूर्व वे लगातार तीन बार सांसद भी रह चुके हैं. समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश ने 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अपनी पार्टी का नेतृत्व किया. उनकी पार्टी को राज्य में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद, 15 मार्च 2012 को उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की. अखिलेश यादव का विवाह डिम्पल यादव के साथ 24 नवंबर 1999 को हुआ था. अखिलेश तीन बच्चों अदिति, टीना और अर्जुन के पिता हैं. इनकी पत्नी सांसद का चुनाव लडी हैं पर 2019 में हार गई. अखिलेश ने मई 2009 के लोकसभा उप-चुनाव में फिरोजाबाद सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी एसपीएस० बघेल को 67,301 मतों से हराकर सफलता प्राप्त की. इसके अतिरिक्त वे कन्नौज से भी जीते. बाद में उन्होंने फिरोजाबाद सीट से त्यागपत्र दे दिया और कन्नौज सीट अपने पास रखी.
अखिलेश को आलोचनाएं भी मिलीं
जुलाई 2012 में जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने उनके कार्य की आलोचना करते हुए व्यापक सुधार का सुझाव दिया तो जनता में यह सन्देश गया कि सरकार तो उनके पिता और दोनों चाचा चला रहे हैं, अखिलेश नहीं. उनकी सरकार को दूसरा झटका तब लगा जब एक आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को निलम्बित करने पर चारों ओर से उनकी आलोचना हुई, जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें नागपाल को बहाल करना पड़ा. 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में 43 व्यक्तियों के मारे जाने व 93 के घायल होने पर कर्फ्यू लगाना पड़ा तथा सेना ने आकर स्थिति पर काबू किया. मुस्लिम व हिन्दू के बीच हुए इस भयंकर दंगे से उनकी सरकार की बड़ी किरकिरी हुई.
मुख्यमंत्री रहते हुए ये किया
अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल मे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे बनवाया, जो भारत का सबसे आधुनिक एक्सप्रेस वे है. यादव ने उ.प्र. में “यू.पी.100 पुलिस सेवा” और “108 एंबुलेन्स फ्री सेवा” शुरू की. उनके कार्यकाल में लखनऊ मैट्रो रेल, लखनऊ इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, जनेश्वर मिश्र पार्क (एशिया का सबसे बड़ा पार्क)[15], जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर, लखनऊ- बलिया समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे 2 . इन्होनें कार्यकाल में प्रदेश मे युवाओ को बड़ी मात्रा में लैपटाॅप वितरण किये गये