आगरालीक्स… आषाढ़ गुप्त नवरात्र कल छह जुलाई से। मां दुर्गे की 10 महाविद्याओं की पूजा घट स्थापना। कब कैसे क्या करें। जानें महत्व।

गुप्त नवरात्र पूरे नौ दिन के होंगे

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान एवं गुरू रत्न भण्डार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक आषाढ़ मास में मनाई जाने वाली गुप्त नवरात्र इस बार प्रतिपदा 06 जुलाई से शुरू होंगी और 15 जुलाई तक रहेगी। आषाढ़ गुप्त नवरात्र का पर्व इस बार पूरे 09 दिन मनाया जाएगा।
वर्ष में चार नवरात्र आते हैं
पुराणों की मान्यता के अनुसार गुप्त नवरात्र में मां दुर्गे की 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। वर्ष में 4 नवरात्र आती हैं जिसमें दो प्रत्यक्ष और दो अप्रत्यक्ष। बता दें, अप्रत्यक्ष नवरात्र को ही गुप्त नवरात्र कहा जाता है। प्रत्यक्ष तौर पर चैत्र और आश्विन की महीने में मनाई जाती हैं, और अप्रत्यक्ष यानी कि गुप्त आषाढ़ और माघ मास में मनाई जाती हैं।
आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों वृद्धि करने का समय
गुप्त नवरात्रि में साधक गुप्त साधनाएं करने शमशान व गुप्त स्थान पर जाते हैं। नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिये अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन योग साधना आदि करते हैं।
गुप्त नवरात्र पूजा विधि
घट स्थापना, अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करना व जवारे स्थापित करना-श्रद्धालुगण अपने सामर्थ्य के अनुसार उपर्युक्त तीनों ही कार्यों से नवरात्र का प्रारंभ कर सकते हैं अथवा क्रमश: एक या दो कार्यों से भी प्रारम्भ किया जा सकता है। यदि यह भी संभव नहीं तो केवल घट स्थापना से देवी पूजा का प्रारंभ किया जा सकता है।
गुप्त नवरात्र पूजा तिथि
प्रतिपदा तिथि.06 जुलाई 2024 शनिवार, माँ काली
और माँ शैलपुत्री पूजा घटस्थापना।
कलश स्थापना मुहूर्त
घटस्थापना मुहूर्त -शुभ का चौघड़िया मुहूर्त,प्रातः 07:05 से 07:05तक रहेगा इसके बाद
-चर,लाभ और अमृत का चौघड़िये में कलश स्थापना प्रातः काल 11:35 मिनट से दोपहर 02.05 मिनट तक की जा सकती है।
-अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना दिन 12.05 मिनट से 12.57 मिनट तक कर सकेंगे।
छह जुलाई शनिवार,पहला दिन- मां काली. गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा के दौरान उत्तर दिशा की ओर मुंह करके काली हकीक माला से पूजा करनी है. इस दिन काली माता के साथ आप भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए. ऐसा करने से आपकी किस्मत चमक जाएगी. शनि के प्रकोप से भी छुटकारा मिल जाएगा। नवरात्र में पहले दिन दिन मां काली को अर्पित होते हैं वहीं बीच के तीन दिन मां लक्ष्मी को अर्पित होते हैं और अंत के तीन दिन मां सरस्वति को अर्पित होते हैं.
मां काली की पूजा में मंत्रों का उच्चारण करना है।
मंत्र- क्रीं ह्रीं काली ह्रीं क्रीं स्वाहा।
ऊँ क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहा।
7 जुलाई रविवार,दूसरी महाविद्या. मां तारा- दूसरे दिन मां तारा की पूजा की जाती है. इस पूजा को बुद्धि और संतान के लिये किया जाता है. इस दिन एमसथिस्ट व नीले रंग की माला का जप करने हैं।
मंत्र- ऊँ ह्रीं स्त्रीं हूं फट।
8 जुलाई सोमवार,तीसरी महाविद्या मां त्रिपुरसुंदरी और मां शोडषी पूजा- अच्छे व्यक्ति व निखरे हुए रूप के लिये इस दिन मां त्रिपुरसुंदरी की पूजा की जाती है. इस दिन बुध ग्रह के लिये पूजा की जाती है. इस दिन रूद्राक्ष की माला का जप करना चाहिए।
मंत्र- ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीये नम:।
09 जुलाई मंगलवार,चौथी महाविद्या. मां भुवनेश्वरी पूजा- इस दिन मोक्ष और दान के लिए पूजा की जाती है. इस दिन विष्णु भगवान की पूजा करना काफी शुभ होगा. चंद्रमा ग्रह संबंधी परेशानी के लिये इस पूजा की जाती है।
मंत्र- ह्रीं भुवनेश्वरीय ह्रीं नम:।
ऊं ऐं ह्रीं श्रीं नम:।
10 जुलाई बुधवार,पांचवी महाविद्या. माँ छिन्नमस्ता- नवरात्रि के पांचवे दिन माँ छिन्नमस्ता की पूजा होती है. इस दिन पूजा करने से शत्रुओं और रोगों का नाश होता है. इस दिन रूद्राक्ष माला का जप करना चाहिए. अगर किसी का वशीकरण करना है तो उस दौरान इस पूजा करना होता है. राहू से संबंधी किसी भी परेशानी से छुटकारा मिलता है. इस दिन मां को पलाश के फूल चढ़ाएं।
मंत्र- श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैररोचनिए हूं हूं फट स्वाहा।
11जुलाई गुरूवार,छठी महाविद्या. मां त्रिपुर भैरवी पूजा- इस दिन नजर दोष व भूत प्रेत संबंधी परेशानी को दूर करने के लिए पूजा करनी होती है. मूंगे की माला से पूजा करें. मां के साथ बालभद्र की पूजा करना और भी शुभ होगा. इस दिन जन्मकुंडली में लगन में अगर कोई दोष है तो वो सभ दूर होता है।
मंत्र- ऊँ ह्रीं भैरवी क्लौं ह्रीं स्वाहा।
12 जुलाई शुक्रवार,सांतवी महाविद्या. मां धूमावती पूजा- इस दिन पूजा करने से द्ररिता का नाश होता है. इस दिन हकीक की माला का पूजा करें।
मंत्र- धूं धूं धूमावती दैव्ये स्वाहा
13 जुलाई शनिवार आंठवी महाविद्या. मां बगलामुखी- माँ बगलामुखी की पूजा करने से कोर्ट-कचहरी और नौकरी संबंधी परेशानी दूर हो जाती है. इस दिन पीले कपड़े पहन कर हल्दी माला का जप करना है. अगर आप की कुंडली में मंगल संबंधी कोई परेशानी है तो मा बगलामुखी की कृपा जल्द ठीक हो जाएगा।
मंत्र-ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखी सर्वदृष्टानां मुखं, पदम् स्तम्भय जिव्हा कीलय, शत्रु बुद्धिं विनाशाय ह्रलीं ऊँ स्वाहा।
14 जुलाई रविवार,नौवीं महाविद्या. मां मतांगी- मां मतांगी की पूजा धरती की ओर और मां कमला की पूजा आकाश की ओर मुंह करके पूजा करनी चाहिए. इस दिन पूजा करने से प्रेम संबंधी परेशानी का नाश होता है. बुद्धि संबंधी के लिये भी मां मातंगी पूजा की जाती है।
मंत्र- क्रीं ह्रीं मातंगी ह्रीं क्रीं स्वाहा।
15 जुलाई सोमवार,दसवी महाविद्या. मां कमला- मां कमला की पूजा आकाश की ओर मुख करके पूजा करनी चाहिए. दरअसल गुप्त नवरात्रि के नौंवे दिन दो देवियों की पूजा करनी होती है।
मंत्र- क्रीं ह्रीं कमला ह्रीं क्रीं स्वाहा
नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन पूर्णाहुति हवन एवं कन्याभोज कराकर किया जाना चाहिए। पूर्णाहुति हवन दुर्गा सप्तशती के मन्त्रों से किए जाने का विधान है किन्तु यदि यह संभव ना हो तो देवी के ‘नवार्ण मंत्र‘, ‘सिद्ध कुंजिका स्तोत्र‘ अथवा ‘दुर्गाअष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र‘ से हवन संपन्न करना श्रेयस्कर रहता है।