आगरालीक्स…. आगरा में भारत बंद में उत्पाद के बाद स्थिति सामान्य हो गई है लेकिन सोशल मीडिया से जहर खोला जा रहा है, 10 अप्रैल को बंद सहित अन्य भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर तीन मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
आगरा में दो अप्रैल को एससी एसटी एक्ट में तुरंत अरेरस्ट न करने के फैसले के विरोध में देशव्यापी भारत बंद के दौरान आगरा में जमकर उत्पाद मचा था। दलित समुदाय के लोगों पर मारपीट, तोडफोड, आगजनी के आरोप लगे हैं। पुलिस मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को अरेस्ट कर रही है। अभी तक 31 मुकदमे दर्ज कर 29 उपद्रवियों को जेल भेज दिया।इसी बीच दलित समुदाय के बाद सवर्ण और ओबीसी द्वारा 10 अप्रैल को बंद रखने की पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी हैं। सोशल मीडिया पर कुछ भड़काऊ पोस्ट भी डाली जा रही हैं। पूर्व में हुए पनवारी कांड सहित अन्य मामलों को सोशल मीडिया की पोस्ट से लोगों के दिमाग में उतारा जा रहा है।
तीन लोगों पर दो मुकदमे दर्ज
10 अप्रैल को भारत बंद कराने के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर लोगों को जोड़ा जा रहा है। इसमें भड़काऊ पोस्ट का भी प्रयोग कर रहे हैं। पूर्व में दलित संगठनों द्वारा किए गए आंदोलन की रूपरेखा भी सोशल मीडिया के माध्यम से ही तैयार हुई थी। अब 10 अप्रैल को फिर वही हालात पैदा ना हो इसलिए पुलिस ने भड़काऊ पोस्ट डालने वाले लोगों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है ।शनिवार देर रात शहर के सदर थाने में फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट डालने के मामले में सोनू पंडित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। वहीं हरीपर्वत में फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट डालने के मामले में पुलिस ने अरुण चौधरी और जितेंद्र कुशवाहा के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया।
आपत्तिजनक पोस्ट पर कार्रवाई
इनमें से अरुण चौधरी ने पूर्व में हुए पनवारी कांड को जोडकर 10 अप्रैल के लिए आपत्तिजनक पोस्ट डाली थी। वहीं, जितेंद्र कुशवाहा ने वाट्सएप ग्रुप पर 10 अप्रैल को भारत बंद के दौरान उपद्रव होने की आशंका जताते हुए लोगों को घरों से ना निकलने की अपील की थी। SP सिटी कुमार अनुपम सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया पर पुलिस की विशेष टीम लगातार नजर बनाए हैं। भड़काऊ पोस्ट या लोगों को भडकाने ने का काम करेगा उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की जाएगी।
फाइल फोटो