
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार दोपहर को मंदिर के पट बंद हो जाने के बाद अंदर एक गोस्वामी की शह पर शादी समारोह का आयोजन किया गया। मंदिर के चौक में फेरों के लिए मंडप बनाया गया। बड़ी संख्या में रिश्तेदार समारोह में शामिल हुए। यहीं फेरे की रस्म हुई और प्रभु के गर्भ गृह के सामने जगमोहन में वर और कन्या ने एक-दूसरे को माला पहनाई। बैंडबाजों की धुनों के बीच हुई शादी से मंदिर गूंज गया, जबकि प्रभु की आरती भी बगैर घंटी के बाद शांतिपूर्वक होती है।
मंदिर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता नन्दकिशोर उपमन्यु ने मीडिया में कहा कि इस बारे में कहा कि मंदिर के अंदर यदि किसी ने शादी समारोह का आयोजन किया है तो यह गंभीर मामला है। मंदिर की किसी भी परंपरा को नुकसान पहुंचाना गलत है। कमेटी अस्तित्व में नहीं है, लिहाजा इस मामले में जो भी कुछ करना है वह मथुरा मुंसिफ को करना है। वहीं मंदिर के प्रबंधक मुनीश शर्मा का फोन रिसीव न होने से इस बाबत बात नहीं हो सकी।
बता दें कि गत वर्ष प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन एवं प्रशासनिक, पुलिस अधिकारियों द्वारा पीछे के चौक में बैठकर प्रसाद गृहण किया था। इसे लेकर खलबली मच गई थी।
Leave a comment