आगरालीक्स ….आगरा के गुड्डी भाई से मिलिए, कोरोना काल में दुकानें बंद करा दी गईं। गुड्डी भाई ने तरीका ही बदल दिया, 61 की उम्र में गुड्डी भाई की चाय के साथ सैंडविच, राजमा चावला, आलू पराठे खाने के बाद डॉक्टर चाट रहे उंगली, सक्सेज स्टोरी।
आगरा के सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज, मोती कटरा में 1964 से गुड्डी चाय की दुकान संचालित है। डॉक्टर से लेकर मेडिकल स्टूडेंट के लिए गुड्डी की चाय थकान दूर कर देती है। एसएन के पूर्व छात्र जो प्रतिष्ठित डॉक्टर हैं वे भी एसएन की तरफ जाते हैं तो गुड्डी की चाय पीना नहीं भूलते हैं। लेकिन 2020 में कोरोना ने हर व्यवसाय को पटरी से उतार दिया। दुकानें बंद हो गईं, एसएन में डॉक्टर रात दिन काम करते थे, उन्हें चाय की जरूरत होती थी लेकिन बाजार बंद थे।
तरीका बदला, महामारी अधिनियम में मुकदमा भी हुआ
गुड्डी भाई उर्फ हरीश बताते हैं कि कोरोना काल में डॉक्टर रात दिन काम कर रहे थे, उन्हें चाय चाहिए, दुकान बंद थी। अपने घर पर ही चाय बनाना शुरू कर दिया। डॉक्टर फोन कर देते थे, लैब और कोविड हास्पिटल में चाय उपलब्ध करा दी जाती थी। कुछ लोगों को अच्छा नहीं लगा उन्होंने शिकायत कर दी, एसएन की तरफ से चाय उपलब्ध कराने के लिए पत्र भी दिया गया था इसके बाद भी महामारी अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर दिया गया। बाद में उसका निस्तारण भी हो गया लेकिन एक आईडिया मिल गया।

चाय के साथ सैंडविच, राजमा चावला और आलू पराठे
गुड्डी भाई बताते हैं कि कोरोना काल में खाने की भी समस्या आ रही थी। इसे देखते हुए सैंडविच, राजमा चावला, आलू पराठे बनाने शुरू किए। मैंंगी तो पहले से बनाते थे लेकिन हर रोज कौन मैगी खाएगा। डॉक्टरों को स्वाद पसंद आ गया और घर से ही सैंडविच बनाना शुरू कर दिया।
फोन पर आर्डर, इसलिए है स्वादिष्ट
डॉक्टर, जूनियर डॉक्टर सबसे ज्यादा व्यस्त रहते हैं। इसे देखते हुए फोन पर आर्डर लेने शुरू कर दिए। डॉक्टर आर्डर कर देते हैं, उन्हें बता देते हैं कि सैंडविच, राजमा चावल, आलू पराठा तैयार हो। भेजना है क्या, स्वादिष्ट भोजन कौन नहीं करना चाहेगा। 10 से 15 मिनट में सप्लाई कर दी जाती है। गुड्डी भाई उर्फ हरीश भाई के हाथ की चाय, काफी, सैंडविच क्यों स्वादिष्ट हैं, वे बताते हैं कि मैं दिल से चाय बनाता हूं, क्योंकि इसी से मेरी पहचान है। जो भी काम आप मन से करते हैं तो वह अच्छा होता है।