आगरालीक्स…(Agra News 17th June).आगरा के 10 वीं और 12 वीं के सीबीएसई और यूपी बोर्ड के छात्र खुद केल्कुलेट कर सकते हैं कि उनके अंक कितने आएंगे, आसान शब्दों में तरीका समझें.
इस तरह तैयार होगा सीबीएसई का 12 वीं का रिजल्ट
हाईस्कूल के रिजल्ट में बेस्ट थ्री सब्जेक्ट के प्राप्तांक का 30 फीसद
उदाहरण 10 वीं के पांच में से तीन विषय जिनमें अधिक अंक हैं, अंग्रेजी में 95, गणित में 96, साइंस में 98= 289 अंक इसका 30 फीसद =86. 7 अंक
11 वीं के प्राप्तांक का 30 फीसद
उदाहरण 11 वीं में 500 में से 480 अंक आए हैं तो 30 फीसद =144 अंक
12 वीं के प्री बोर्ड का 40 फीसद
12 वीं के प्री बोर्ड में 490 अंक आए हैं तो 40 फीसद अंक =196
कुल प्राप्तांक 500 में से 426. 7 अनुमान के तहत 85 फीसद
यूपी बोर्ड का 12 वीं का रिजल्ट
हाईस्कूल के 50 फीसद
11 वीं के 40 फीसद
12 वीं प्री बोर्ड के 10 फीसद
छात्रों से ली जाए स्वीकृति
सरकार द्वारा जारी किए गए अध्यादेश पर उतर प्रदेश अभिभावक संघ की ओर से वरिष्ठतम वकील श्री पंकज कुमार ने यह माँग की है कि CBSE को परीक्षाफल घोषित किए जाने से पहले ही उन छात्रों से स्वीकृति पत्र ले लेने चाहिए जो वास्तव में भौतिक रूप से परीक्षा देना चाहते हैं। अन्यथा की स्थिति में परिणाम घोषित किए जाने के उपरांत अंकों को आधार बनाकर आपत्ति जताए जाने से अत्यधिक अव्यवस्था उत्पन्न हो जाएगी.
प्री बोर्ड के 40 प्रतिशत तर्कसंगत नहीं
सरकार द्वारा जारी किए गए मूल्यांकन के दिशा-निर्देश पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अप्सा (असोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव स्कूल्स ऑफ आगरा) के अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि देश भर में ऐसे बहुत से विद्यालय हैं, जहाँ प्री-बोर्ड परीक्षा आयोजित ही नहीं हुई थीं। ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करने वाले विद्यालयोँ की संख्या लगभग नगण्य है। ऑनलाइन आयोजित की गई प्री बोर्ड परीक्षा की महत्ता तो हम सभी से छिपी नहीं है। ऐसे में प्री-बोर्ड परीक्षा को चालीस प्रतिशत अंकों का आधार बनाया जाना तर्कसंगत नहीं है। कक्षा दस के परीक्षाफल को तीस प्रतिशत कक्षा बारहवीं के परिणाम में शामिल किया जाना तर्कसंगत नहीं है क्योंकि कक्षा दस में सभी अनिवार्य विषय होते हैं जबकि कक्षा बारह के विषयों का चयन छात्रों द्वारा अपनी रुचि के अनुसार किया जाता है। कक्षा ग्यारह में अध्ययन और परीक्षा को लेकर छात्रों में कोई विशेष उत्साह नहीं होता और न ही उन्हें इस बात का भान ही था कि कक्षा ग्यारह के परीक्षाफल को उनके कक्षा बारहवीं के परिणाम में शामिल किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रयोगात्मक परीक्षाओं को लेकर भी स्पष्ट निर्देश नहीं हैं, जिस कारण इसे लेकर भी मौखिक परीक्षा के संदर्भ में भ्रांतियाँ एवं परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्वकेंद्र बनाकर भौतिक रूप से आयोजित हो परीक्षा
डॉ. गुप्ता ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आगे कहा कि धीरे धीरे सामान्य होती जा रही परिस्थितियों को देखते हुए बोर्ड को अगस्त माह में स्वकेंद्र बनाकर छात्रों के लिए भौतिक रूप से परीक्षा आयोजित करने पर गहनता से विचार करना चाहिए था। जब जेईई और नीट की प्रवेश परीक्षा आयोजित की जा सकती है तो कक्षा बारहवीं की परीक्षा क्यों नहीं? अगर स्वकेंद्र बनाकर छात्रों द्वारा परीक्षा दी जाती तो छात्रों की सीमित संख्या के साथ सभी कोविद के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए बोर्ड परीक्षा आयोजित की जा सकती थी, जिसकी गुणवत्ता और मूल्यांकन पर कोई संदेह नहीं रहता।