आगरालीक्स ..आगरा में छठ मैया की पूजा की जा रही है। चार दिन का व्रत है,पहले दिन नहाय-खाय, इस दिन लौकी की सब्जी,चने की दाल और चावल खाया जाता है जिसमे मसाले के नाम पर केवल हल्दी के साथ सेंधा नमक और घी का प्रयोग होता है
दूसरे दिन व्रती सुबह से ही निर्जला रहकर शाम को खरना पूजन करते हैं जिसमे खरना(खीर) का प्रसाद सभी लोग एक दूसरे के यहां जाकर खाते हैं जो कि प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है
(दूसरे दिन से अगले 36 घंटे तक व्रती निर्जला रहते हैं और किसी भी प्रकार के नमक का प्रयोग वर्जित होता है)
तीसरे दिन शाम को नदी में जाते हैं और जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं (हिंदुस्तान का एकमात्र त्योहार जिसमे अस्ताचलगामी सूर्य की पूजा होती है)
चौथे दिन प्रातः सूर्योदय से पहले पुनः नदी में जाकर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सूर्य की उपासना की करते हैं
अखिलेश जी ने बताया कि उनके यहां भी बहुत सारे मित्रों ने आकर प्रसाद ग्रहण किया,जिसमे मुख्य रूप से फतेहपुरसीकरी से आये डॉ यू सी मिश्रा(मूल निवासी अयोध्या) और उनकी पत्नी श्रीमती अनुपमा ने बच्चों के साथ प्रसाद ग्रहण किया