आगरालीक्स… आगरा के डॉ भीमराव आंबेडकर में एसएन के एमबीबीएस छात्र को छह अंक दिए, तीन प्रोपफेसर से जांच कराने पर 20 अंक दिए गए हैं, मेडिकल छात्र को विवि देगा एक लाख रुपये, हाईकोर्ट ने विवि को बेपरवाह परीक्षकों से कॉपी चेक ना कराने के दिए आदेश।
एसएन मेडिकल कालेज, आगरा के 2017 बैच के एमबीबीएस छात्र देवर्श नाथ गुप्ता ने दिसंबर 2018 में फस्र्ट प्रोफेशनल की परीक्षा दी। फिजियोलॉजी में छात्र को 50 में से मात्र छह अंक दिए गए, जबकि छात्र को 600 में से 344 अंक प्राप्त करने के बाद भी छात्र फिजियोलॉजी में फेल हो गया। उसने विवि में स्क्रूटनी और पुनमरूल्यांकन के लिए आवेदन किया। विवि ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद छात्र ने जनसूचना अधिकार के तहत अपनी कॉपी प्राप्त कर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए एमएलएन मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज के तीन प्रोफेसरों के पैनल से इस कॉपी का पुनमरूल्यांकन कराया। तीनों प्रोफेसरों ने छात्र को 50 में 19, 20 और 21 अंक दिए।
औसत 20 अंक देते हुए एक लाख का लगाया हर्जाना
इस पर हाईकोर्ट ने 20 औसत अंक के साथ छात्र को संशोधित मार्क्सशीट जारी करने के आदेश विश्वविद्यालय को दिए हैं। साथ ही विश्वविद्यालय पर एक लाख रुपये हर्जाना भी किया है। विवि के कुलसचिव केएन सिंह का कहना है कि इस मामले में विधिक राय ली जा रही है।
तीन साल के मामलों में पुनर्मूल्यांकन कराने के आदेश
विवि में पिछले तीन साल में पुनमरूल्यांकन के जितने भी आवेदन आए हैं, उन सभी में पुनमरूल्यांकन कराने के आदेश भी विवि ने दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि विवि यह नहीं कह सकता कि पुनमरूल्यांकन का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही भविष्य में गैरजिम्मेदार, अयोग्य, बेपरवाह परीक्षक से मूल्यांकन ना कराने के आदेश भी दिए हैं।