
पिछले वर्ष नाई की मंडी क्षेत्र के रहने वाले पुष्पेंद्र सिंह के खाते से 20 हजार रुपये पार कर लिए गए थे। शिकायत पर साइबर सेल ने जांच की और नाई की मंडी में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इस मामले में जांच कर रही साइबर सेल शातिरों का पता हासिल करने में कामयाब हुई। इसके बाद रविवार को टीम ने सरगना रमेश सिंह और इसमें शामिल नई दिल्ली के जौहरीपुर एन्क्लेव निवासी संतोष मौर्या, मंगोलपुरी नई दिल्ली निवासी राकेश कुमार को गुड़गांव से गिरफ्तार कर लिया।
एसएसपी राजेश डी मोदक ने पत्रकार वार्ता में बताया कि राकेश 12वीं पास है, जबकि संतोष आठवीं और रमेश चौथी क्लास तक ही पढ़ा है। राकेश ने गूगल से ऑन लाइन ठगी की तकनीक सीखी। इनके कब्जे से 44 सिम कार्ड, पांच मोबाइल, एक लैपटॉप, दो वाईफाई और पांच एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं।
ऐसे बनाते थे शिकार
अपराध के तरीके पर राकेश ने बताया कि यूपी के लोगों को शिकार बनाना आसान है। वे शिकार का मोबाइल नंबर हासिल कर बैंक अधिकारी बनकर बातें करते थे। बातों में ही अकाउंट की जानकारी के साथ-साथ एक्सपाइरी और कार्ड के पीछे लिखा तीन डिजिट का नंबर पूछ लेते थे। इसके बाद खाते से ऑन लाइन ट्रांजेक्शन कर खाते से पैसा उड़ाते ओर एयरटेल मनी और पे टू ऑल जैसी साइट्स पर बनाए गए पर्स में इसे सुरक्षित रख लेते थे। शातिर कई अकाउंट्स से पैसा ट्रांसफर करते थे तो कई से ऑन लाइन शॉपिंग भी करते थे। ठगे गए पैसों के जरिए ऑन लाइन गेंबलिंग से भी शातिरों ने मोटी कमाई की थी।
– इंटरनेट पर ऑन लाइन पैसा कमाने वाली ठगी की साइट्स मौजूद हैं। इन पर रोक लगनी चाहिए।
– कुछ बैंक पिन नंबर बिना ही ऑन लाइन ट्रांजेक्शन करा देते हैं। इससे ठगी में आसानी रहती है।
– एटीएम कार्ड के पीछे तीन डिजिट का नंबर लिखा होता है। यदि बैंक सिर्फ उन लोगों को यह नंबर दे, जो ऑन लाइन ट्रांजेक्शन करता है। तो आम उपभोक्ता ठगों को यह नंबर नहीं बता पाएगा और बच जाएगा।
– मोबाइल कंपनियां अपना टारगेट पूरा करने के चक्कर में प्री एक्टिवेटिड सिम थोक में उपलब्ध करा देती हैं। इससे साइबर शातिरों की राह आसान हो जाती है। इन पर रोक लगे।
– फोन पर एटीएम और बैंक एकाउंट से संबंधित जानकारी कभी किसी को भी न दें। कोई भी बैंक फोन पर जानकारी नहीं मांगता, केवल ठग ही करते हैं।
ऐसे बनाते थे शिकार
अपराध के तरीके पर राकेश ने बताया कि यूपी के लोगों को शिकार बनाना आसान है। वे शिकार का मोबाइल नंबर हासिल कर बैंक अधिकारी बनकर बातें करते थे। बातों में ही अकाउंट की जानकारी के साथ-साथ एक्सपाइरी और कार्ड के पीछे लिखा तीन डिजिट का नंबर पूछ लेते थे। इसके बाद खाते से ऑन लाइन ट्रांजेक्शन कर खाते से पैसा उड़ाते ओर एयरटेल मनी और पे टू ऑल जैसी साइट्स पर बनाए गए पर्स में इसे सुरक्षित रख लेते थे। शातिर कई अकाउंट्स से पैसा ट्रांसफर करते थे तो कई से ऑन लाइन शॉपिंग भी करते थे। ठगे गए पैसों के जरिए ऑन लाइन गेंबलिंग से भी शातिरों ने मोटी कमाई की थी।
याद नहीं कमाई
पुलिस अधिकारियों के बीच शातिर खुलकर बोला कहा कि लोगों को ऑन लाइन ठगकर कितना पैसा कमाया, यह याद नहीं है। हां शिकार खूब मिले और उनसे खूब कमाई की।
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