
लुटेरों को पकड़ने के लिए तत्काल एक्शन के बजाए सवालों की बौछार कर दी। सोना कितना था? कहां से लाए थे? क्या उसकी खरीद की रसीद है? इसी तरह के सवालों में पुलिस ने दस से पंद्रह मिनट का वक्त गुजार दिया। इधर जब पुलिस सर्राफ से पूछताछ कर रही थी, उस समय लुटेरे हॉस्पीटल रोड के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो रहे थे। इसके बाद कंट्रोल रूम को लूट की सूचना दी गई। वहीं रात 9.52 बजे बदमाश एमएम गेट थाना क्षेत्र में सर्राफ की एक्टिवा छोड़कर भाग निकले।
लुटेरों के फरार होने के बाद पुलिस का पूरा ध्यान सर्राफ को झूठा साबित करने में लग गया। मौके पर पहुंचे अधिकारी सर्राफ की किसी भी बात पर भरोसा करने को तैयार नहीं थे। रात को दो बार सर्राफ की दुकान खुलवाई गई। सोना खरीद के कागजात लेने के बाद उनके अन्य अभिलेखों को भी साथ ले जाने लगे। व्यापारी के विरोध के बाद आयकर अफसरों की तरह बिल की फोटो कॉपी और सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर लेकर पुलिस अधिकारी वहां गए। हरीपर्वत थाने से चौबे जी के फाटक के बीच पुलिस घूमती रही और इसमें सुबह के साढे़ चार बज गए। सुबूतों से संतुष्ट होने के बाद बदमाशों का ख्याल आया।
उधर, रात 1.20 बजे एमएम गेट थाना क्षेत्र में लेडी लॉयल के पास पुलिस को कारोबारी की एक्टिवा लावारिस खड़ी मिली। चाबी लगी हुई थी और डिग्गी खुली थी।
हालांकि रात में एसएसपी राजेश डी मोदक ने शहरभर में रात 11 से सुबह चार बजे तक सघन चेकिंग के निर्देश दिए थे, लेकिन इसका असर कहीं देखने को नहीं मिला।
कैमरों में कैद है पुलिस की लापरवाही
सोमवार को जब सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरे चेक किए तो पुलिस की लापरवाही की हकीकत सामने आ गई। रिकार्डिग के मुताबिक, बदमाश एक्टिवा को रात 9.52 बजे छोड़कर गए हैं। दो बाइक पर सवार चार बदमाशों के पचास मीटर आगे नूरी गेट की ओर से एक्टिवा लेकर एक बदमाश आया। उसे यहां खड़ी कर बदमाश राजामंडी चौराहे की ओर निकल गए। इससे साफ है कि घटना के ठीक बाद चेकिंग शुरू हो जाती तो बदमाश भी पकड़े जाते और सोना भी बरामद होता।
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