
मंगलवार को बारामूला, कश्मीर निवासी मंजूर अहमद विवि के खंदारी कैंपस स्थित इंस्टीटयूट आॅपफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी आईईटी पहुंचे। यहां डीन डॉ वीके सारस्वत को अपने बेटे सादिक दार की बीटेक की डिग्री दिखाई और डिग्री सही है या नहीं, इसके बारे में जानकारी करने लगे। उन्होंने बताया कि सादिक कुबैत में नौकरी कर रहा है। दिल्ली के एक स्टडी सेंटर ने विवि की बीटेक की डिग्री देने के लिए पांच लाख में डीलिंग की, स्टडी सेंटर से आईईटी की वर्ष 2014 की बीटेक मैकेकिनल की डिग्री दे दी।
डीन डॉ वीके सारस्वत ने बताया कि आईईटी से बीटेक के बजाय बीई होता है, इसके बाद डिग्री को देखा तो शक हुआ। जांच में वह डिग्री पफर्जी निकली, जबकि मार्कशीट को फॉरमेट अंबेडकर विवि का ही था। इस पर उन्होंने मंजूर अहमद को बिठा लिया और पूछताछ करने लगे।
कुलसचिव को बुलाया, लेकिन नहीं आए
इस मामले में कार्रवाई के लिए डीन डॉ वीके सारस्वत ने कुलसचिव अशोक अरविंद को बुलाया, जिससे फर्जी मार्कशीट का रैकेट पकडा जा सके। कई घंटे के इंतजार के बाद वे नहीं आए, इसके बाद पूरे प्रकरण की शिकायत पत्र के माध्यम से की गई है। मंजूर अहमद के आधार कार्ड सहित कई अन्य दस्तावेजों की फोटोकॉपी रख ली गई है।
विवि की दिल्ली से बन रही हैं मार्कशीट
फर्जी मार्कशीट का फॉरमेट वही है जिस पफॉर्मेट पर विवि द्वारा मार्कशीट तैयार की जा रही हैं। एजेंसी द्वारा दिल्ली से ही विवि की मार्कशीट तैयार की जा रही हैं, एजेंसी की ब्लैंक मार्कशीट भी गायब हुई थी। हो सकता है कि विवि की सैकडों छात्रों को फर्जी मार्कशीट और डिग्री दे दी गई हो।
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