आगरालीक्स…(1 February 2022 Agra News) आगरा का ‘आगरा सिटी स्टेशन’ 118 साल पुराना है. विरासत में ये ताजमहल से कम नहीं है, लेकिन इस ऐतिहासिक स्टेशन की याद कम ही आती है. कुछ लोग हैं जो चाहते हैं कि ये स्टेशन बने हेरिटेज….
आगरा में कई हेरिटेज यानी संरक्षित स्मारक हैं. ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी तो विश्व प्रसिद्ध हैं. हर साल लाखों लोग इनका दीदार करने के लिए आते हैं. क्योंकि ये इमारतें हमारी विरासत हैं, जिनसे ऐतिहासिक स्मृतियां भी जुड़ी हुई हैं. लेकिन आगरा का ‘आगरा सिटी स्टेशन’ भी विरासत के मामले में ताजमहल से कम नहीं है. 118 साल पुराने इस स्टेशन से शहर के लोगों की कई स्मृतियां जुड़ी हुई हैं. लेकिन अब इस स्मारक की याद कुछ कम ही आती है. शहर के बीचोंबीच ये स्टेशन खामोश ही रहता है. लेकिन आगरा के कुछ लोग ऐसे भी है जो चाहते हैं कि ये ऐतिहासिक स्टेशन भी अपनी गरिमा प्राप्त करे.
आगरा के नेशनल चेंबर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि आगरा का सिटी स्टेशन प्राचीनतम स्टेशनों में से एक है. यह 118 साल पहले स्थापित हुआ था. शहर के मध्य में होने से यह शहरवासियों के लिए रेल यात्रा के लिए बहुत ही सुगम है. पूर्व में यहां से लगभग हर गंतव्य के लिए गाड़ियों का संचालन होता रहा है. इस स्टेशन से आगरा शहर की स्मृतियां जुड़ी हुई है. इस स्टेशन को हेरिटेज के रूप में सुरक्षित किया जाना आवश्यक है. इस स्टेशन को संरक्षित करने के लिए चैंबर द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
कई जिम्मेदारों को लिखे हैं पत्र
चैंबर की ओर से इस स्टेशन की इमारत को रखरखाव के साथ और अधिक बेहतरीन व सुंदर बनाने, खाली जमीन पर सघन वृक्षारोपण करने, इमारत की डेंटिंग पेंटिंग कराकर आगरा के दर्शनीय स्थलों के प्रतीकों के साथ इसे खूबसूरत बनाने के संबंध में रेल मंत्री, डीआरएम आगरा, चेयरमैन रेलवे बोर्ड, सांसद राजकुमार चाहर, केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल, राज्यसभा सांसद हरिद्वार दुबे, आगरा महापौर नवीन जैन को पत्र प्रेषित किए गए हैं.
जनजीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण स्टेशन
आगरा के वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना ने बताया कि आगरा सिटी स्टेशन महानगर के जनजीवन के लिए महत्वपूर्ण स्टेशन रहा है. इसके एक छोर का ट्रैक जहां यमुना नदी पर बने स्ट्रैची ब्रिज पर से होकर गुजरता है वहीं दूसरे छोर का ट्रैक महानगर की घनी आबादी वाले भाग से भूमिगत टनल से होकर निकलता है. इसी के साथ स्टेशन की इमारत का पुरातन लुक है जो पर्यटकों को ही नहीं बल्कि आम लोगों को भी बरबस आकर्षित करता है. इस स्टेशन को संरक्षित करने की मांग रेलवे से की हुई है, किंतु भारतीय रेल के (एनसीआर डिवीजन) के सीई ( जनरल) इंजीनियर डिपार्टमेंट ने इस स्टेशन को संरक्षित करने के लिए अपनी स्पष्ट अनुमति देने के स्थान पर केवल रेलवे स्टेशन भवन के रखरखाव के उपयुक्त होने संबंधी औपचारिकता टिपण्णी की है.

राजीव सक्सेना ने आगे बताया कि सीई (जनरल) इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की इस टिप्पणी के बाद उन्होंने स्टेशन बिल्डिंग के बाहर स्टेशन के इतिहास की जानकारी के लिए “अंकित पट” भी लगवाने का अनुरोध किया जिसे विभाग ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि इस पर कोई ही धन खर्च करना अनुपयुक्त है. चेंबर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि सी ई (जनरल) इंजीनियर डिपार्टमेंट की इस टिप्पणी के बाद चेंबर से उन्हें एक पत्र प्रेषित किया गया है कि हो सकता है कि रेलवे के पास स्टेशन के बारे में “जानकारी पट” लगाए जाने के लिए धन की कमी हो, लेकिन अगर यह लग जाता है तो जो भी स्टेशन पर आएगा निश्चित रूप से उसकी जानकारी में अभिवृद्धि होगी. आगरा में तमाम पुरातत्व संपदा हैं उन्हें देखने भले ही कोई आए या ना आए किंतु “जानकारी पट ” जरूर लगा है. वैसे भी पर्यटन प्रधानता वाले आगरा महानगर की यह अहम जरूरत है.
उन्होंने आगे बताया कि नेशनल चैंबर रेलवे की ओर से सी ई ( जनरल) द्वारा दी गई जानकारी को संज्ञान में लेकर होर्डिंग या सूचना बोर्ड पर आने वाले खर्च का दायित्व वहन करने को तत्पर हैं. पत्र में सी ई (जनरल) से यह निवेदन किया गया है कि सूचना पट पर व्यय होने वाले धन की जानकारी चैम्बर को देने का कष्ट करें. साथ ही उनसे यह अपेक्षा की गई है कि स्टेशन परिसर का सुंदरीकरण, हरियाली आच्छादन एवं अन्य कार्य करवाने की भी आवश्यकता है. उन कार्यों को भी करवाने के लिए नेशनल चैंबर विचार करने के लिए सहमत है.