आगरालीक्स…आगरा में आज अस्पताल—क्लीनिक सब बंद रहे, इमरजेंसी सेवाएं ठप होने से भटके मरीज, डॉक्टरो ने दो टूक कहा, शासन—प्रशासन सुरक्षा सुनिश्चित करे. ऐसे भयावह माहौल में नहीं कर सकते काम
महिला चिकित्सक की आत्महत्या के बाद स्ट्राइक
राजस्थान के दौसा में महिला चिकित्सक की आत्महत्या के बाद आगरा में आईएमए के आह्वान पर डॉक्टर लामबंद हो गए हैं। 24 घंटे की हड़ताल पर हैं। अस्पताल—क्लीनिक सब बंद हैं और इमरजेंसी सेवाएं भी ठप हो गई हैं। इससे मरीज इलाज के लिए इधर—उधर भटक रहे हैं। वहीं डॉक्टरो ने दो टूक कहा है कि शासन—प्रशासन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे वे ऐसे भयावह माहौल में काम नहीं कर सकते जहां डॉक्टरों पर हमले हो रहे हैं, उनकी जानें तक जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को न मानते हुए और बिना किसी मेडिकल बोर्ड की जांच के डॉक्टरों पर संगीन धाराओं में मुकदमे किए जा रहे हैं।

24 घंटे की हड़ताल की थी घोषित
बता दें कि 28 मार्च को राजस्थान के दौसा में प्रसव के बाद पोस्ट पार्टम हैमरेज के चलते प्रसूता की मौत हो गई थी। इस मामले में डॉ. अर्चना शर्मा के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। तनाव में आकर 29 मार्च को डॉ. अर्चना शर्मा ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद से डॉक्टर भड़के हुए हैं। आईएमए आगरा ने 31 मार्च 2022 को 24 घंटे की हड़ताल घोषित कर दी थी। आज सुबह छह बजे शहर भर के अस्पतालों और क्लीनिकों के दरवाजे बंद कर लिए गए। बाहर काम ठप होने के नोटिस चस्पा कर दिए गए। मरीजों को वापस लौटना पड़ा। इमरजेंसी सेवाएं भी ठप रहने से दिक्कतें और बढ़ गईं। मरीजों को एक से दूसरे अस्पताल की ओर दौड़ लगाते देखा गया, लेकिन सभी जगह अस्पताल बंद मिले।
आईएमए भवन में इकट्ठा हुए चिकित्सक
इधर आईएमए भवन पर सुबह से ही हलचल नजर आने लगी थी। दोपहर दो बजे तक सैकड़ों चिकित्सक इकठ्ठा हो गए। जनरल बॉडी की मीटिंग हुई और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। अध्यक्षता कर रहे डॉ. राजीव उपाध्याय ने जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब के ममाले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं बिना मेडिकल बोर्ड की जांच के किसी डॉक्टर पर मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता, जबकि पुलिस हमें आए दिन अपराधी बनाकर खड़ा कर देती है। डॉ. पंकज नगायच ने कहा कि लाखों रुपये और दशकों का समय लग जाता है तब जाकर कोई एक चिकित्सक बनता है। एक चिकित्सक का इस तरह चला जाना देश् की क्षति है। अध्यक्ष निर्वाचित डॉ. ओपी यादव ने कहा कि पुलिस अंग्रेजों के बनाए ढर्रे पर काम न करे। शहर कप्तान हर थाने में लिखित आदेश भेजें कि किसी भी डॉक्टर पर मुकदमा दर्ज न करें, क्योंकि इससे पहले मेडिकल बोर्ड द्वारा जांच की जाती है। सचिव डॉ. अनूप दीक्षित ने बंद का ब्यौरा दिया। डॉ. रवि पचौरी ने साथी चिकित्सकों से कहा कि कानून की पूरी समझ रखें ताकि ऐसे जटिल मामलों से निपटा जा सके। डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने कहा कि डॉ. अर्चना भी एक मां थीं, उनका इस तरह चला जाना कितना तकलीफदेह है। अब तो लोगों को समझना होगा कि कोई भी डॉक्टर कभी नहीं चाहेगा कि उसके मरीज को कोई खतरा हो, बल्कि वह उसे उस खतरे से निकालने की कोशिश करता है। जेएन टंडन ने संगठित होकर रहने और पलटवार की रणनीति बनाने की बात रखी। डॉ. मुनीश्वर गुप्ता ने कहा कि एक डॉक्टर दिमागी रूप से बहुत सशक्त होता है वह आत्महत्या कर ले ऐसा हो ही नहीं सकता। अब सोचने की बात है कि डॉ. अर्चना को किस हद तक प्रताड़ित किया गया। डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने कहा कि लोगों को समझना होगा कि वे कैसे उन लोगों पर हमला कर सकते हैं जो उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे हैं। यह बंद होना चाहिए। अन्य चिकित्सकों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सिस्टम के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। कहा कि शासन—प्रशासन हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करे वरना इस भय के माहौल में हम काम नहीं कर सकते।

शहीद स्मारक पर दिया धरना, डॉ. अर्चना के लिए न्याय की मांग
जनरल मीटिंग के बाद शाम छह बजे सभी चिकित्सक शहीद स्मारक पहुंचे और धरना प्रदर्शन किया। डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ, डॉ. मनोज शर्मा, डॉ. पवन गुप्ता, डॉ. वीके शर्मा, डॉ. अंजना शर्मा, डॉ. हरेंद्र गुप्ता, डॉ.एलके गुप्ता, डॉ. दीपक गोयल, डॉ. अश्वनी यादव, डॉ. अतुल सिंघल, डॉ. मोहन भटनागर, डॉ. सुष्मा, डॉ. वेद गोयल, डॉ. एकता, डॉ. रंजू शर्मा, डॉ. जॉली गोयल, डॉ. नीतू चौधरी, डॉ. गायत्री गुप्ता, डॉ. आरती मनोज, डॉ. सविता त्यागी, डॉ. नीहारिका मल्होत्रा, डॉ. एके खन्ना, डॉ. अनलि सारस्वत, डॉ. रामनिवास गुप्ता, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. वीरेंद्र खंडेलवाल, डॉ. वीएन कौशल, डॉ. एसके चंद्र, डॉ. प्रखर गुप्ता, डॉ. दीपक गोयल, डॉ. अनीता शर्मा, डॉ. संगीता चतुर्वेदी, डॉ. वर्षा गौतम, डॉ. दर्शा, डॉ. अल्का, डॉ. अरुण जैन, डॉ. चंदन, डॉ. शिवानी शिखा, डॉ. राकेश त्यागी, डॉ. नीलम रावत, डॉ. विनय अग्रवाल, डॉ. श्रद्धा, डॉ. मीनल जैन, डॉ. अमित, डॉ विनेश, डॉ. प्रवेग समेत सभी चिकित्सकों ने डॉ. अर्चना को श्रद्धांजलि देने के बाद उनके लिए न्याय और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।