आगरालीक्स… दीपोत्सव पर्व के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा, वरुण, इंद्र, अग्नि आदि देवताओँ की पूजा का विधान है। इस दिन गाय बैल आदि पशुओँ को स्नान कराकर फूलमाला चंदन आदि से पूजन किया जाता है। गायों को मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारी जाती है। ब्रजवासियों का यह मुख्य त्योहार है। अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारंभ हुई, उस समय लोग भगवान इंद्र की पूजा करते थे और छप्पन प्रकार के भोग लगाते थे।
अन्नकूट का महत्व
अन्नकूट एक प्रकार से सामूहिक भोज का आयोजन है, जिसमें पूरा परिवार और वंश एक जगह बनाई गई रसोई से भोजन करता है। इस दिन चावल, बाजरा कढ़ी, साबुत मूंग और सभी सब्जियां एक जगह मिलाकर बनाई जाती हैं। मंदिरों में अन्नकूट का प्रसाद बांटा जाता है।
गोवर्धन पूजा
इस दिन प्रातः गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है। अनेक स्थानों पर इसे मनुष्याकार बनाकर पुष्प, लताओँ आदि से सजाया जाता है। शाम को गोवर्धन की पूजा की जाती है। धूप, दीप नैवेद्य, जल, फल, फूल, खील बताशे आदि का भोग लगाया जाता है।