
एक ही लक्ष्य आईआईटी और एक ही काम बस पढाई
ट्रांस यमुना कॉलोनी निवासी हर्ष के पिता कपडा एजेंट हैं, दसवीं में ही उन्होंने आईआईटी को लक्ष्य बना लिया था। उन्होंने तैयारी की और तैयारी भी इतनी की कोई सोच नहीं सकता है। सुबह से लेकर रात तक पढाई और पढाई, इसके अलावा और कोई काम नहीं। इससे वे पहले ही प्रयास में आईआईटी में प्रवेश ले सकेंगे। उनकी 294 वें रैंक आई है। बेटे की सफलता पर मां अनीता जैन और पिता संजय जैन गदगद हैं। हर्ष कंप्यूटर साइंस में करियर बनाना चाहते हैं।
मन लगाकर पढाई से मिलती है सफलता, आयुष
बल्केश्वर निवासी आयुष गोयल की 406 वीं रैंक आई है। आयुष ने बताया कि उनके पिता अनूप इंजीनियर बनना चाहते थे, लेकिन पैतृक व्यापार करना पड़ा। उन्होंने इंजीनियर बन पिता का सपना पूरा किया है। आयुष कंप्यूटर साइंस ब्रांच में जाना चाहते हैं। उनका मानना है कि कितने घंटे पढना है यह मायने नहीं रखता है, आप क्या और कैसे पढ रहे हैं। इससे सफलता मिलती है।
बैग सिलते हैं पिता, आईआईटी से बेटा करेगा बीटेक
मोहनपुरा निवासी अरिहंत की कंप्यूटर साइंस ब्रांच पहली पसंद है। पिता बैग सिलते थे, उनकी आस सिर्फ मेरी सफलता पर टिकी थी। कोचिंग में निशुल्क तैयारी जरूर होती, फिर भी खर्च की जरूरत होती। पिता के संघर्ष से कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा मिली। इतना कहते ही अरिहंत की आंखें नम हो गई। नार्थ ईदगाह कालोनी शिवम गर्ग बताते हैं कि पिता दीपक गर्ग, मेडिकल स्टोर पर नौकरी करते हैं। तंगी थी, लेकिन पिता उसे इंजीनियर बनाना चाहते थे। शिवम सिविल इंजीनियर बनना चाहते हैं।
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