आगरालीक्स..ब्रज में शुरू हुआ होली का उल्लास. बरसाना की लठामार होली के लिए तैयारियां शुरू. जानिए कब खेली जाएगी लठामार होली, लड्डू होली, फूलों की होली और हुरंगा
होली हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है और ब्रज की होली की ख्याति विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान रखती है। बसंत का महीना लगने के बाद से ब्रज में इसकी धूम शुरू हो जाती है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा की रात होलिका दहन किया जाता है और इसके अगले दिन होली मनाई जाती है। ब्रज की विश्व प्रसिद्ध होली खेलने के लिए इस बार करीब 27 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है। उसी के अनुरूप पुलिस-प्रशासन इंतजाम करने की तैयारी में जुट गया है। जल्द ही होली के संबंध में प्रशासन-जनप्रतिनिधियों की बैठक भी होने जा रही है।दस साल पहले तक यहां 7 लाख के करीब लोग होली पर आते थे, जिनमें से करीब दो लाख बरसाना की लठामार होली में पहुंचते थे, मगर इस बार बरसाना में करीब 5 लाख लोगों के आने की संभावना है।
14 मार्च को होली का पर्व
इस वर्ष 14 मार्च को होली का पर्व है। इससे एक सप्ताह पहले नंदगांव में फाग आमंत्रण उत्सव के साथ मुख्य कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाएगी। इसी दौरान नंदगांव व बरसाना में लड्डू होली और लठामार होली होगी। साथ ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भी लठामार होली पर जश्न होगा। वहीं वृंदावन में भी भक्त फूलों की होली का आनंद लेंगे। डीआईजी शैलेश कुमार पांडे ने बताया कि होली के पर्व को लेकर तैयारी शुरू हो गई हैं। होली पर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे। हर वर्ष की तरह इस साल भी पीएसी, आरएएफ लगाई जाएगी। वहीं पर्यटन अधिकारी हेतराम सिंह ने बताया कि ब्रज की विश्व प्रसिद्ध होली के संबंध में बैठक प्रस्तावित है। जल्द ही वह होने जा रही है। ब्रज की होली में साल-दर-साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है।
जानिए कब कौन सी होली खेली जाएगी
7 मार्च 2025 शुक्रवार : लड्डू होली, श्रीजी मंदिर बरसाना
8 मार्च 2025 शनिवार : लठामार होली बरसाना
9 मार्च 2025 रविवार : लठामार होली नंदगांव
10 मार्च 2025 सोमवार : फूलों की होली, बांके बिहारी मंदिर, बरसाना और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा
11 मार्च 2025 मंगलवार : गोकुल होली और छड़ीमार होली गोकुल
12 मार्च 2025 बुधवार : गोपीनाथ मंदिर, वृंदावन में विधवाओं की होली
13 मार्च 2025 गुरुवार : होलिका दहन
14 मार्च 2025 शुक्रवार : मथुरा—वृंदावन सहित पूरे देश दुनिया में होली
15 मार्च 2025 शनिवार : हुरंगा, दाऊजी मंदिर बलदेव