
एक अंग्रेजी वेबसाइट के अनुसार 36 साल की नेपाल निवासी सुनीता दुआवर जिस्म फरोशी के दलदल में फंसी लड़कियों को बचा रही है। जब वे 14 साल की थी तो उन्हें नौकरी दिलवाने का लालच देकर भारत लेकर आया गया था और यहां एक कमरे में बंद कर दिया गया जहां रोजाना उसे लोगों के सामने फेंक दिया जाता था। यहां तक की कई बार तो उसे नींद से उठाकर ग्राहकों के सामने परोसा जाता था। सुनीता ने आगे बताया कि ‘मुझे बाहर भी नहीं जाने दिया जाता था। एक कमरा था जिसमें खिड़की की जगह दिवार में लोहे की सरियां लगी हुई थी। स्थानीय पुलिस वालों को भी रिश्वत देकर चुप करवा दिया जाता था।’ सुनीता ने बताया कि एक बौद्ध भिक्षु उसकी मदद के लिए आगे आए और बचा लिया। इसके बाद वो उसे नेपाल वापस लेकर आए।
अब 36 वर्ष की हो चुकी सुनीता पूरी मेहनत से उन लड़कियों को बचाने में लगी है जो इन मानव तस्करों के निशाने पर होती हैं। सुनीता एक चैरिटी ग्रुप भी चलाती है जिसका नाम शक्ति समूह रखा है। इसमें ज्यादातर वो महिलाएं काम करती हैं जो कि वैश्यालयों से बचाई गई हैं। आंकड़ों के अनुसार नेपाल मानव तस्करों की पसंद की जगह है।
भूकंप के बाद आगरा के वैश्यालयों में नेपाली युवती
नेपाल में आए भूकंप के बाद वहां की युवतियों को भारत के वैश्यालयों में बेचने की आशंका है। आगरा सहित कई शहरों के वैश्यालयों में नेपाली युवतियों को बेचा गया है और उनसे सेक्स का धंधा कराया जा रहा है।
हर साल सात हजार महिलाएं और बच्चे
यूनिसेफ की 2013 की रिपोर्ट के अनुसार हर साल 7 हजार महिलाएं और बच्चों को नेपाल से भारत वैश्यालयों में काम करने के लिए लाया जाता है। ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार लगभग 2 लाख नेपाली वैश्यालयों में काम कर रहे हैं।
भूकंप के बाद वहां की हालत और खराब है और सुनीता को चिंता है कि ऐसे में नेपाल की नाबालिग और युवा लड़कियां आसान शिकार बन जाएंगी। सुनीता के अनुसार, ‘लोग काफी उत्सुक हैं सीमा पार जाकर पैसा कमाने के लिए। हमें डर है कि मानव तस्कर लड़कियों को लालच दे सकते हैं जिन्होंने अपने परिवार को खो दिया है। सुनीता के ग्रुप ने 21 लड़कियों को बचाया है जिनकी उम्र 16-19 साल के बीच है।
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