आगरालीक्स(07th September 2021 Agra News)… गणेश चतुर्थी पर वास्तु अनुसार कहां स्थापित करें गणेश जी की प्रतिमा. अपने घर का वास्तु सुधारना है तो अपनाएं ये आसान तरीका.
दस सितंबर को है गणेश चतुर्थी
गणेश चतुर्थी दस सितंबर को है। आगरा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य हेमंत पुरोहित ने बताया कि बहुत ही आसान तरीके से हम अपने घर का वास्तु दोष दूर कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी की प्रतिमा को अगर वास्तु के हिसाब से स्थापित करें तो घर के अधिकांश दोष दूर हो जाएंगे।
वास्तुदोष दूर करने को ये करें उपाय
उन्होंने बताया कि सुख, शांति, समृद्धि के लिए सफेद रंग के विनायक की मूर्ति लाएं। घर में इनका एक स्थाई चित्र भी लगाना चाहिए। सर्व मंगल की कामना करने वालों के लिए सिंदूरी रंग के गणपति की आराधना करें।
पूजा के लिए ये लाभकारी
ज्योतिषाचार्य हेमंत पुरोहित ने बताया कि घर में पूजा के लिए गणेश जी का चित्र या प्रतिमा शयन या बैठी मुद्रा में हो तो अधिक शुभ होता है। यदि कला या अन्य शिक्षा के प्रयोजन से पूजन करना हो तो नृत्य करती गणेश की प्रतिमा या तस्वीर का पूजन लाभकारी है।
घर में इन्हें करें स्थापित
घर में बैठे हुए और बाएं हाथ के गणेश जी को विराजित करना चाहिए। दाएं हाथ की ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी हठी होते हैं। उनकी साधना-आराधना कठिन होती है। वह देर से भक्तों पर प्रसन्न होते हैं।
कार्यस्थल पर ये करें
ज्योतिषाचार्य हेमंत पुरोहित ने बताया कि कार्यस्थल पर गणेश जी की मूर्ति विराजित कर रहे हों तो खड़े हुए गणेश जी की मूर्ति लगाएं। इससे कार्यस्थल पर स्फूर्ति और काम करने की उमंग हमेशा बनी रहती है। कार्य क्षेत्र पर किसी भी भाग में वक्रतुण्ड की प्रतिमा या चित्र लगाए जा सकते हैं, लेकिन यह ध्यान जरूर रखना चाहिए कि किसी भी स्थिति में इनका मुंह दक्षिण दिशा या नैऋय कोण में नहीं होना चाहिए।

मूर्ति में मोदक जरूर हो
मंगल मूर्ति को मोदक और उनका वाहन मूषक अतिप्रिय है। इसलिए मूर्ति स्थापित करने से पहले ध्यान रखें कि मूर्ति या चित्र में मोदक या लड्डू और चूहा जरूर होना चाहिए। गणेश जी की मूर्ति स्थापना भवन या वर्किंग प्लेस के ब्रह्म स्थान यानी केंद्र में करें। ईशान कोण और पूर्व दिशा में सुखकर्ता की मूर्ति या चित्र लगाना शुभ रहता है।
घर के मुख्य द्वार पर ये चित्र लगाएं
ज्योतिषाचार्य हेमंत पुरोहित ने बताया कि यदि घर के मुख्य द्वार पर एकदंत की प्रतिमा या चित्र लगाया गया हो तो उसके दूसरी तरफ ठीक उसी जगह पर दोनों गणेश जी की पीठ मिली रहे, इस प्रकार से दूसरी प्रतिमा या चित्र लगाने से वास्तु दोषों का शमन होता है। यदि भवन में द्वारवेध हो मतलब दरवाजे से जुड़ा किसी भी तरह का वास्तुदोष हो (भवन के द्वार के सामने वृक्ष, मंदिर, स्तंभ आदि के होने पर द्वारवेध माना जाता है)। ऐसे में घर के मुख्य द्वार पर गणेश जी की बैठी हुई प्रतिमा लगानी चाहिए। लेकिन उसका आकार 11 अंगुल से अधिक नहीं होना चाहिए
घी मिश्रित स्वास्तिक बनाएं
उन्होंने बताया कि भवन के जिस भाग में वास्तु दोष हो उस स्थान पर घी मिश्रित सिन्दूर से स्वास्तिक दीवार पर बनाने से वास्तु दोष का प्रभाव कम होता है। स्वस्तिक को गणेश जी का रूप माना जाता है। वास्तु शास्त्र भी दोष निवारण के लिए स्वास्तिक को उपयोगी मानता है।
स्वास्तिक वास्तु दोष दूर करने का महामंत्र है। यह ग्रह शान्ति में लाभदायक है। इसलिए घर में किसी भी तरह का वास्तुदोष होने पर अष्टधातु से बना पिरामिड यंत्र पूर्व की तरफ वाली दीवार पर लगाना चाहिए।
रविवार को पुष्य नक्षत्र पड़े, तब श्वेतार्क या सफेद मंदार की जड़ के गणेश की स्थापना करनी चाहिए। इसे सर्वार्थ सिद्धिकारक कहा गया है। इससे पूर्व ही गणेश को अपने यहां रिद्धि-सिद्धि सहित पदार्पण के लिए निमंत्रण दे आना चाहिए और दूसरे दिन, रवि-पुष्य योग में लाकर घर के ईशान कोण में स्थापना करनी चाहिए।
ये कर सकती हैं संकट
श्वेतार्क गणेश की प्रतिमा का मुख नैऋत्य में हो तो इष्टलाभ देती है। वायव्य मुखी होने पर संपदा का क्षरण, ईशान मुखी हो तो ध्यान भंग और आग्नेय मुखी होने पर आहार का संकट खड़ा कर सकती है।
दूर्वा दल चढ़ाएं
पूजा के लिए गणेश जी की एक ही प्रतिमा हो। गणेश प्रतिमा के पास अन्य कोई गणेश प्रतिमा नहीं रखें। एक साथ दो गणेश जी रखने पर रिद्धि और सिद्धि नाराज हो जाती हैं। गणेश को रोजाना दूर्वा दल अर्पित करने से इष्टलाभ की प्राप्ति होती है। दूर्वा चढ़ाकर समृद्धि की कामना से ऊं गं गणपतये नम: का पाठ लाभकारी माना जाता है। वैसे भी गणपति विघ्ननाशक तो माने ही गए हैं।