
मैराथन का इतिहास…..
मैराथन नाम फेडिप्पिडिस नामक यूनानी धावक की किंवदंती से आया है। किंवदंती कहती है कि उन्हें मैराथन से ऐथेंस यह घोषित करने के लिए भेजा गया था कि फारसियों को मैराथन के युद्ध (जिसमें वह खुद भी लड़ रहा था) में हरा दिया गया है,यह ई.पू. 490 की अगस्त या सितंबर में हुई थी। कहा जाता है कि वह पूरे रास्ते बिना रुके दौड़ा और फिर सभा में प्रवेश करके बोला “हम जीत गए” और फिर गिर पड़ा और मर गया।शुरू में मैराथन की लंबाई नत्थी नहीं की गई क्योंकि सभी धावक उसी रास्ते पर दौड़ें यही ज्यादा जरूरी था। पहले के कुछ ओलंपिक खेलों में मैराथन दौड़ें किसी तय दूरी की नहीं होती थीं, पर लगभग 40 किलोमीटर (25 मील), की थीं, जो कि मैराथन से एथेंस के बीच के लंबा सपाट रस्ते की लंबाई है।मैराथन लंबी दूरी की दौड़ प्रतियोगिता है जिसकी आधिकारिक दूरी 42.195 किलोमीटर (26 मील और 385 गज) है, यह आमतौर पर सड़क दौड़ के तौर पर दौड़ी जाती है। पहले हर दौड़ की अपनी अपनी लंबाई होती थी। हर साल पूरी दुनिया में 500 से ज्यादा मैराथन आयोजित होती हैं इनमें अधिकांश धावक शौकिया होते हैं। बड़े मैराथनों में हजारों धावक भी हो सकते हैं।
मिनी मैराथन ……
मिनी मैराथन, मैराथन की अपेक्षा कम दूरी लगभग 10 किमी तक की सड़क दौड़ है, जो हाॅफ मैराथन के ही दूसरे नाम मिनी मैराथन से जानी जाती है। मिनी मैराथन को किसी थीम से जोड़ कर के आयोजित किया जाता है, ताकि वह समाज को एक संदेश दे।
मिनी मैराथन 2016….
आइआइएमटी,अलीगढ़ ने शहर में पहली बार सन् 2013 में 21 फरबरी को मिनी मैराथन 2013 डीएम आवास से स्टेडियम तक आयोजित की। दूसरी बार सन् 2015 में 22 फरबरी को मिनी मैराथन 2015 आयोजित की, जो बेटी बचाओ, मानवता बचाओ की थीम पर था। जिसमें युवा, छात्र-छात्राओं, अलीगढ़ वासियों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।
इस बार तीसरी बार दिनांक 21 फरवरी 2016 को मिनी मैराथन 2016 का थीम स्वस्थ युवा, सुदृढ़ भारत पर आयोजन डीएम आवास से आइआइएमटी, अलीगढ़ तक किया जा रहा है।
अपील…
आइआइएमटी, अलीगढ़ सभी नागरिकों से अपील करता है कि मिनी मैराथन 2016 में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर स्वस्थ युवा, सुदृढ़ भारत के संदेश को जन-जन तक पहुंचाऐं।
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