आगरालीक्स..(शरद यादव)…आगरा में पति पत्नी और दो बच्चों का हर महीने का खर्चा 20 हजार तक पहुंचा। महंगाई का जोर का झटका धीरे-धीरे… कभी गैस तो कभी नेट महंगा। सब्जी सस्ती तो तेल, दाल महंगी। बच्चों की पढ़ाई, दवा का खर्चा अलग से। इस सबका सीधा असर पड़ रहा है घरेलू बजट पर।
धीरे-धीरे सभी वस्तुओं के दाम बढ़े
कोविड-19 का प्रकोप 2020 से शुरू होने और लॉकडाउन के बाद हर चीज में बदलाव आया है। खाने-पीने की वस्तु हों अथवा पढ़ाई-लिखाई, दवा हो अथवा कोई अन्य सामान हर महीने धीरे-धीरे हर वस्तु की कीमतों में इजाफा हो रहा है।
आलू जैसी सब्जी सस्ती नहीं रही
लॉकडाउन के समय से ही आलू जैसी चीज पर दाम बढ़ने शुरू हो गए थे, होली के ऊपर आने वाली नई फसल पर भी ज्यादा कम नहीं हुए और अब आकर फिर दामों में इजाफा हो गया है। सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव झेलते हुए ही खाद्य तेलों की कीमतों ने दोगुना तक उछाल आ गया।

कीमतें बढ़ीं दोगुनी और घटे नाममात्र को
बाद में हो-हल्ला हुआ तब कहीं जाकर खाद्य तेलों पर दस-पांच रुपये कम भी हुए तो उसका कोई खास असर नहीं पड़ा। इसी प्रकार आटा, दाल, चावल, चीनी, गुड़, घी समेत सभी वस्तुओं में तेजी आ गई। इन वस्तुओँ के महंगा होने पर दुकानदारों ने अपने खाद्य पदार्थ भी महंगे कर दिए।
पेट्रोल-डीजल के दाम घटे पर किराया-भाड़ा नहीं
पेट्रोल-डीजल की कीमतें सौ रुपये तक पहुंचने के बाद उत्पाद शुल्क घटाने से क्रमशः दस और पांच रुपये की कमी हुई। पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने पर किराया-भाड़ा दोनों बढ़ गए। अब कीमतों में कमी आई है तो किराए-भाड़े में कोई कमी नहीं हुई है।
दवाओँ का बढ़ गया है अतिरिक्त खर्च
कोरोना के बाद दवा की कीमतों पर खासा असर पड़ा है। हर दवा की कीमतों में कुछ न कुछ बढ़ोत्तरी की गई है।
पैसे नहीं बढ़ाए तो वजन कम कर दिया
कई कंपनियों ने अपने खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी नहीं की तो उनका वजन अथवा साइज छोटा कर दिया। संख्या को कम कर दिया गया।
बड़ी कंपनियां भी पीछे नहीं
ऐसा नहीं कि यह सब छोटी कंपनियों ने किया हो, बड़ी कंपनियों ने भी इस कारनामे को अंजाम दिया है। पांच रुपये के पैकेट में बिस्कुट छोटे और संख्या में कम हो गए हैं। पाचन की गोलियां जो एक रुपये में आठ से दस आती थीं, वह छह पर सिमट गई हैं।
मोबाइल कंपनियों ने बढ़ाई मुसीबत
मोबाइल कंपनियों ने अपनी दरों में वृद्धि कर दी है। कोरोना के बाद ऑनलाइन पढ़ाई के लिए अपने बच्चों के लिए महंगे मोबाइल खरीदने को मजबूर हुए अभिभावकों को अब मोबाइल डेटा के लिए अतिरिक्त खर्च करना होगा।
ट्रेनों में चाय की चुस्की पर भी असर
ट्रेनों में एक दिसंबर से खाने-पीने का सामान मिलना शुरू हो गया है लेकिन रेलवे ने ट्रेन में मिलने वाली चाय की कीमत को बढ़ा दिया है। नई दरों के तय होने के बाद फर्स्ट एसी में सफर करने वालों को चाय अब 35 रुपये की मिलेगी। सेकेंड एसी में सफर करने वालों को चाय के लिए 20 रुपये चुकाने होंगे।
इनका कहना है
महंगाई के धीरे-धीरे से लगे यह झटके घरेलू बजट पर डबल मार कर चुके हैं। बढ़ती महंगाई को लेकर बेलनगंज पथवारी निवासी बीना शर्मा और विनीता दिवाकर कहती हैं कि घरेलू बजट को किस तरह नियंत्रित करें समझ में नहीं आ रहा है। किसी एक चीज में कटौती करती हैं, तब तक दूसरे की कीमतें बढ़ जाती हैं। किससे कहें और कया कहें, समझ में नहीं आ रहा है।
चार सदस्यीय मध्यम परिवार का बजट
बच्चों की फीस (दो बच्चे) 9000 रुपये
मोबाइल खर्चा 500 रुपये
दूध (एक लीटर) 1650 रुपये
सब्जी 1500 रुपये
गैस सिलेंडर 913 रुपये
बिजली का बिल 1200 रुपये
पेट्रोल 1500 रुपये
राशन 2000 रुपये
अऩ्य खर्चे 2000 रुपये
कुल खर्चा — 20263 रुपये
नोट- मध्यम वर्ग का यह औसत बजट है, जो गृहणियों की जानकारी के आधार पर है। इसमें कुछ ऊपर-नीचे हो सकता है।