
पिछले दिनों ताजमहल की पच्चीकारी पर हरे दाग दिखाई दिए थे। ये दाग कैसे पडे इसकी जांच कराई गई, एएसआई की रसायन शाखा ने सेंट जोंस के एंटोमोलॉजी विभाग के साथ मिलकर नमूने लिए और उनकी डीएनए लैब में जांच की।
इंटरनेट फोटो
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ताजमहल की पच्चीकारी को हरा करने वाला कीट गोल्डीकाइरोनोमस है। यक कीट यमुना की तरफ से उडकर ताजमहल पर आ रहा है। यहां झुंड में ताजमहल की संगमरमर पर बैठ जाते हैं और उसे हरा कर रहे हैं।
15 दिन का लार्वा
गोल्डीकाइरोनोमस कीट पानी में पफासपफोरस की मात्रा बढने से पनपता है, इसका पफीमेट कीट एक बार में 700 अंडे तक देता है, इनका लार्वा 15 दिन का होता है और यह लार्वा एल्गी खाता है। इस तरह लार्वा से करीब 20 दिन में पूरा कीट बन जाता है।
बडी मात्रा में यमुना में पनप रहे गोल्डीकाइरोनोमस
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यमुना में प्रदूषण बढने से बडी मात्रा में गोल्डीकाइरोनोमस कीट पनप रहे हैं। एक बार में 700 अंडे देने से इनकी संख्या बहुत तेजी से बढ रही है, इसकी रोकथाम न होने पर ताजमहल पर बडा नुकसान हो सकता है, इसे देखते हुए एएसआई की रसायन शाखा सक्रिय हो गई है। इस मामले में कई देशों के विशेषज्ञों से भी जानकारी ली जा रही है, जिससे ताजमहल को कीट से बचाया जा सके।
कई झील बर्बाद कर चुका है कीट
गोल्डीकाइरोनोमस कीट घातक है, इसका अंदाजा आस्ट्रेलिया की एक झील से लगाया जा सकता है। वहां यह पनपे लगा और इनकी संख्या तेजी से बढने लगी, जिससे झील का रंग ही बदल गया। इसके चलते यहां पर्यटकों ने आना ही बंद कर दिया। इसी तरफ जापान में भी गोल्डीकाइरोनोमस कीट से पर्यटन प्रभावित हो चुका है।
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