आगरालीक्स …टेस्ट टयूब में जब स्पर्म और एग मिलते हैं तो बच्चा होता है, यह बच्चा ही टेस्ट टयूब बेबी है, जाने आगरा के एकमात्र एम्ब्रोलॉजिस्ट डॉ केशव मल्होत्रा से।
सवाल क्या टेस्ट टयूब में बच्चा बडा होता है, इससे यह कमजोर होता होगा
एम्ब्रोलॉजिस्ट डॉ केशव मल्होत्रा. यह एक भ्रम है, टेस्ट टयूब बेबी जिसे तकनीकी भाषा में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी आईवीएफ कहा जाता है। इसका मतलब है कि सामान्य प्रक्रिया में पति पत्नी संबंध बनाते हैं, पत्नी के मैच्योर अंडाणु से पति के शुक्राणु का मिलन होता है और भ्रूण बन जाता है, यह गर्भधारण की प्रक्रिया है। यह प्राक्रतिक तरीके से नहीं हो पाती है तो इसे शरीर से बाहर किया जाता है। महिला के अंडाणु और पुरुष शुक्राणु को शरीर से बाहर टेस्ट टयूब में फर्टिलाइज कराया जाता है, इससे भ्रूण तैयार होते हैं, इस भ्रूण को तीन से पांच दिन तक इन्क्यूवेटर में रखा जाता है। इसके बाद भ्रूण को मां की कोख में हस्तांतरित कर दिया जाता है, नौ महीने तक शिशु मां की कोख में ही पनपता है। जिस तरह से सामान्य शिशु का जन्म होता है इसी तरह से आईवीएफ में भी शिशु का जन्म सिजेरियन और नार्मल डिलीवरी से होता है। इसलिए यह बच्चा भी सामान्य बच्चों की तरह से ही होता है, कोई कमजोरी और कमी नहीं होती है। बल्कि सामान्य बच्चों से ज्यादा स्वस्थ्य भी होता है, क्योंकि भ्रूण को हस्तांतरित करने से पहले कोई जन्मजात बीमारी तो नहीं है, इसकी भी जांच की जाती है।

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सवाल टेस्ट टयूब बेबी कहां कराना चाहिए
एम्ब्रोलॉजिस्ट डॉ केशव मल्होत्रा… टेस्ट टयूब बेबी एक अच्छे सेंटर में कराना चाहिए, क्योंकि इसकी सफलता तकनीकी और इलाज करने वाले डॉक्टर पर निर्भर करती है। इसके सक्सेज रेट 40 फीसद तक हैं, खर्चा भी लगभग अच्छे सेंटर का एक जैसा ही है, इसलिए ऐसा सेंटर चुनना चाहिए जहां नई तकनीकी और एक्सपर्ट उपलब्ध हों।